Saudi Arabia: सऊदी अरब मंगोलिया को सौंपेगा COP17 की अध्यक्षता, यूलानबाटार में होगा बड़ा सम्मेलन.

Nura Basta13 August 20262 min read59 viewsSaudi
Saudi Arabia: सऊदी अरब मंगोलिया को सौंपेगा COP17 की अध्यक्षता, यूलानबाटार में होगा बड़ा सम्मेलन.

सऊदी अरब पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। रियाद में COP16 के सफल आयोजन के बाद अब सऊदी अरब मंगोलिया के उलानबाटार में होने वाले संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलन के 17वें सत्र (COP17) में भाग लेगा। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान, सऊदी अरब आधिकारिक तौर पर इस सम्मेलन की अध्यक्षता मंगोलिया को सौंपेगा। इस बारे में आधिकारिक जानकारी Saudi Press Agency (SPA) द्वारा साझा की गई है। यह सम्मेलन 17 अगस्त से 28 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें दुनिया भर के देश हिस्सा लेंगे।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य और थीम

इस बार के सम्मेलन की थीम "Restoring Land, Restoring Hope" यानी जमीन को बचाना और उम्मीद जगाना रखी गई है। इस थीम के तहत दुनिया भर में सूखे की समस्या, जमीन के बंजर होने और मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए व्यावहारिक समाधानों पर चर्चा की जाएगी। UNCCD की रिपोर्ट के अनुसार, इस वैश्विक मंच का मुख्य मकसद अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन और पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके।

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मिडिल ईस्ट ग्रीन इनिशिएटिव की पहली बार भागीदारी

इस बड़े सम्मेलन में मिडिल ईस्ट ग्रीन इनिशिएटिव (MGI) का जनरल सचिवालय पहली बार हिस्सा लेगा। यह संगठन कुल 35 क्षेत्रीय सदस्य देशों के साथ मिलकर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ काम कर रहा है। इस पहल का मुख्य लक्ष्य बड़े पैमाने पर पौधे लगाना और पर्यावरण को हरा-भरा बनाना है। इसके तहत कुल 50 अरब पेड़ लगाने और 20 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है, जैसा कि UNCCD Agenda में बताया गया है।

जल संकट पर होगी विशेष चर्चा

सम्मेलन की कार्यवाहियों के दौरान सऊदी अरब का प्रतिनिधिमंडल एक विशेष साइड इवेंट का आयोजन भी करेगा। इस कार्यक्रम का शीर्षक "Addressing Global Water Challenges, Journey to the 11th World Water Forum" रखा गया है। इस सत्र के दौरान दुनिया भर में पानी की कमी और उससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से बातचीत की जाएगी और सतत विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं पर जोर दिया जाएगा ताकि भविष्य में पानी के संकट से निपटा जा सके।

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