सऊदी अरब और ट्यूनीशिया अब व्यापार के मामले में और करीब आने वाले हैं। सऊदी काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स ने दोनों देशों के बीच कस्टम यानी सीमा शुल्क से जुड़े एक अहम समझौते को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से दोनों देशों के बीच सामानों के लेन-देन और आपसी मदद का रास्ता और आसान हो जाएगा।

सऊदी और ट्यूनीशिया के बीच यह समझौता क्या है?

सऊदी अरब की काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स ने 5 मई 2026 को इस समझौते को अपनी आधिकारिक मंजूरी दी। असल में, इस समझौते पर साइन दिसंबर 28-29, 2025 को रियाद में हुई 12वीं ट्यूनिशियन-सऊदी जॉइंट कमेटी की बैठक के दौरान किए गए थे। इस समझौते का मुख्य मकसद कस्टम मामलों में दोनों देशों की सरकारों के बीच सहयोग और आपसी मदद को बढ़ाना है।

व्यापार और निवेश पर क्या असर पड़ेगा?

यह पूरा कदम सऊदी अरब के Vision 2030 के ढांचे के तहत उठाया गया है। सऊदी के इंडस्ट्री और मिनरल रिसोर्सेज मिनिस्टर Bandar bin Ibrahim Al-Khorayef ने बताया कि इस मीटिंग से ट्रेड, इकोनॉमी और निवेश को बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं ट्यूनीशिया के इकोनॉमी मिनिस्टर Samir Abdelhafidh ने इसे दोनों देशों के कानूनी रिश्तों को मजबूत करने वाला एक नया कदम बताया। खास बात यह है कि जुलाई 2025 में हुई एक मीटिंग के बाद सितंबर 2025 तक दोनों देशों के बीच व्यापार में 38 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी।

कस्टम के अलावा और किन क्षेत्रों में होगा सहयोग?

दिसंबर 2025 की उस बैठक में केवल कस्टम ही नहीं, बल्कि चार अन्य समझौतों और MoUs पर भी दस्तखत हुए थे। इन समझौतों में माइनिंग (खनन), पोस्टल सर्विसेज (डाक सेवा) और मीडिया जैसे जरूरी क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी कोशिशों का मकसद दोनों देशों के बीच आर्थिक तालमेल को और बेहतर बनाना है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सऊदी काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स ने इस समझौते को कब मंजूरी दी?

सऊदी काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स ने 5 मई 2026 को सऊदी अरब और ट्यूनीशिया के बीच कस्टम सहयोग समझौते को मंजूरी दी।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य सीमा शुल्क (Customs) के मामलों में दोनों देशों की सरकारों के बीच सहयोग बढ़ाना और आपसी मदद सुनिश्चित करना है।

कस्टम के अलावा और किन समझौतों पर साइन हुए हैं?

कस्टम के साथ-साथ माइनिंग, पोस्टल सर्विस और मीडिया जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग के लिए समझौते किए गए हैं।