गज़ा में हो रहे हमलों पर भड़के खाड़ी देश, सऊदी अरब, UAE और कतर समेत कई देशों ने जताया कड़ा विरोध

6 अगस्त 2026 को सऊदी अरब और कई अन्य अरब व इस्लामी देशों ने गज़ा पट्टी में हो रही इजरायली सैन्य कार्रवाई पर अपनी कड़ी नाराजगी जताई है। यूएई, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। इन देशों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि स्वास्थ्य सुविधाओं, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और आम नागरिकों, खासकर महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। इस पूरी जानकारी के बारे में अधिक विवरण यूएई विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन पर जताई चिंता
इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भी 6 अगस्त 2026 को कब्जे वाले यरूशलेम के उत्तर में स्थित कलंदिया शरणार्थी शिविर पर हुए हमले की निंदा की है। इससे पहले, 5 अगस्त को अम्मान में हुई एक मंत्री-स्तरीय बैठक में इंडोनेशिया के उप विदेश मंत्री अरमानथा नासिर ने दुनिया भर के देशों से आग्रह किया कि वे फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इजरायल की बढ़ती आक्रामकता के खिलाफ अपनी चुप्पी तोड़ें। संयुक्त बयान में चेतावनी दी गई है कि इस तरह की हरकतें गज़ा संघर्ष को खत्म करने की योजना को पटरी से उतार सकती हैं और क्षेत्र में तनाव को और अधिक बढ़ा सकती हैं।
गज़ा में लगातार बढ़ रही है मौतों की संख्या
द फिलिस्तीन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के अनुसार, 6 अगस्त 2026 को पिछले 24 घंटों में इजरायली हमलों में कम से कम 22 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। संघर्ष विराम के बाद से अब तक मरने वालों की कुल संख्या 1,230 तक पहुँच चुकी है। वहीं, जॉर्डन के उप प्रधान मंत्री और विदेश मंत्री ऐमन सफादी ने आरोप लगाया कि इजरायल बस्तियों का विस्तार करके पूर्वी यरूशलेम पर अपना कब्जा और मजबूत कर रहा है। दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 5 अगस्त 2026 को साफ कर दिया है कि उन्होंने 'बोर्ड ऑफ पीस' की हमास निशस्त्रीकरण योजना को स्वीकार नहीं किया है और वे गज़ा से तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक कि हमास पूरी तरह से निहत्था नहीं हो जाता। यह स्थिति खाड़ी देशों और पूरे क्षेत्र के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि इससे वहां रहने वाले लोगों और प्रवासियों के लिए अस्थिरता बढ़ रही है।