सऊदी अरब के गृह मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सऊद बिन नायफ और ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेटे कूपर के बीच 12 मार्च 2026 को रियाद में एक अहम बैठक हुई. इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच सुरक्षा समन्वय और आपसी सहयोग को बढ़ाना है. सऊदी सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया है कि देश में रहने वाले नागरिकों और अलग-अलग देशों से आकर काम करने वाले प्रवासियों की सुरक्षा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है.

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बैठक में किन अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

ब्रिटेन की विदेश मंत्री मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच पहली बार सऊदी अरब के दौरे पर पहुंची हैं. इस उच्च स्तरीय मुलाकात में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए जो सीधे तौर पर आम लोगों और विदेशी वर्कर की सुरक्षा से जुड़े हैं.

  • दोनों देशों के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग और डिफेंस सहयोग मजबूत करने पर बात हुई.
  • सऊदी अरब में रहने वाले 25 हजार से ज्यादा ब्रिटिश नागरिकों समेत सभी देशों के प्रवासियों की हिफाजत पर जोर दिया गया.
  • ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर रखने और एनर्जी सिक्योरिटी पर भी चर्चा की गई.

सऊदी में काम करने वाले प्रवासियों पर इसका क्या होगा असर

सऊदी अरब में लाखों भारतीय और अन्य देशों के लोग काम करते हैं. 11 और 12 मार्च को रियाद और अन्य इलाकों में 31 ड्रोन और 3 मिसाइल से हमले की कोशिश की गई थी, जिसे सऊदी एयर डिफेंस ने पूरी तरह नाकाम कर दिया था. इस घटना के बाद बैठक के जरिए सरकार ने आम लोगों को यह संदेश दिया है कि देश में आंतरिक सुरक्षा और स्थिरता पूरी तरह से मजबूत है.

इस बातचीत से विदेशी नागरिकों और निवेशकों को एक सुरक्षित माहौल का भरोसा दिया गया है. ब्रिटेन ने भी खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों की निंदा की और नागरिकों की सुरक्षा के लिए सऊदी अरब को अपना पूरा समर्थन देने की बात कही है. इससे यहां रहकर नौकरी और बिजनेस करने वाले प्रवासियों का डर खत्म होगा और उनका भरोसा बढ़ेगा.