सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में इसराइल के खिलाफ बहुत सख्त रुख अपनाया है। सऊदी ने साफ कह दिया है कि फिलिस्तीन की जमीन पर इसराइल का कब्जा या वहां अपनी हुकूमत चलाने की कोई भी कोशिश पूरी तरह गलत और बेकार है। यह बयान पूरी दुनिया के सामने अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिया गया है।

ℹ️: Saudi Arabia UN Security Council: सऊदी अरब का बड़ा बयान, फिलिस्तीन की जमीन पर इजरायल के दावे को बताया गलत, जेरूसलम की स्थिति बदलने का किया विरोध

19 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र में सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि Abdulaziz Alwasil ने अरब समूह (Arab Group) की तरफ से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इसराइल जो भी कदम फिलिस्तीनी इलाकों पर अपना कब्जा मजबूत करने के लिए उठा रहा है, वे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और यूएन चार्टर का खुला उल्लंघन हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी सभी कोशिशें शून्य हैं और इन्हें कभी नहीं माना जाएगा।

सऊदी अरब ने यरूशलेम (Jerusalem) के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 1967 से यरूशलेम कब्जे वाले क्षेत्रों का हिस्सा है और इसकी कानूनी या ऐतिहासिक पहचान को बदलने की किसी भी कोशिश को खारिज किया जाता है। सऊदी ने मांग की कि वहां के पवित्र स्थलों की स्थिति वैसी ही बनी रहे जैसी पहले थी।

शांति बनाए रखने के लिए सऊदी अरब और अरब समूह ने एक बड़ा रास्ता बताया। उनका कहना है कि जब तक फिलिस्तीन के लोगों को उनके हक नहीं मिलते, तब तक शांति नहीं आएगी। उन्होंने जोर दिया कि 1967 की सीमाओं के आधार पर एक आजाद फिलिस्तीन देश बनना चाहिए, जिसकी राजधानी पूर्वी यरूशलेम (East Jerusalem) हो।

इस मुद्दे पर सऊदी अरब अकेला नहीं है। 18 जून 2026 को एक साझा बयान जारी हुआ था जिसमें कई देशों के विदेश मंत्रियों ने इसी बात का समर्थन किया। इन देशों में शामिल हैं:

  • UAE
  • जॉर्डन
  • तुर्की
  • मिस्र
  • इंडोनेशिया
  • पाकिस्तान
  • कतर

Abdulaziz Alwasil ने इसराइल की हरकतों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि आम नागरिकों को निशाना बनाना, बस्तियों का विस्तार करना, जमीन कब्जाना और घरों को तोड़ना जैसी घटनाएं जारी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही चलता रहा, तो यह पूरे इलाके और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन जाएगा।