संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक में सऊदी अरब ने सीरिया का पुरजोर समर्थन किया है. सऊदी अरब ने कहा कि सीरिया की एकता और उसकी सीमाओं का सम्मान होना चाहिए. अरब समूह की ओर से बोलते हुए सऊदी प्रतिनिधि ने सीरिया को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों की लिस्ट से हटाने की अपील की है.

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सऊदी अरब के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि डॉ. अब्दुलअज़ीज़ अलवसिल ने 22 जून 2026 को सुरक्षा परिषद की बैठक में यह बात कही. उन्होंने ज़ोर दिया कि सीरियाई सरकार का अधिकार उसके पूरे इलाके पर होना चाहिए. उन्होंने तर्क दिया कि 1979 में पुराने शासन के दौरान सीरिया को आतंकवाद की लिस्ट में डाला गया था, लेकिन दिसंबर 2024 में शासन बदलने के बाद अब राजनीतिक हालात बदल चुके हैं, इसलिए उसे इस लिस्ट से बाहर करना ज़रूरी है.

अलवसिल ने इस बात का भी समर्थन किया कि सीरियाई सरकार ISIS और अन्य आतंकी संगठनों से लड़ने की कोशिश कर रही है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि इस लड़ाई में सीरिया की मदद की जाए. साथ ही, उन्होंने उन देशों के लिए और ज़्यादा आर्थिक मदद मांगी जो सीरियाई शरणार्थियों को अपने यहाँ पनाह दे रहे हैं, ताकि उनका आर्थिक बोझ कम हो सके.

इसराइल की हरकतों पर जताई नाराज़गी

सऊदी प्रतिनिधि ने सीरियाई ज़मीन पर इसराइल के हमलों और घुसपैठ की कड़ी निंदा की. उन्होंने इसे सीरिया की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन बताया. सऊदी अरब ने मांग की कि इसराइल 1974 के समझौते का पालन करे और कब्जे वाले सीरियाई गोलान क्षेत्र से तुरंत पीछे हट जाए. इससे पहले मार्च और नवंबर 2025-26 में भी सऊदी विदेश मंत्रालय ने इसराइल की ऐसी कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया था.

आर्थिक सुधार और शरणार्थियों की वापसी

बैठक में बताया गया कि जून 2025 में अमेरिका द्वारा ज़्यादातर आर्थिक प्रतिबंध हटाने के बाद सीरिया की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है. अब वहाँ विदेशी निवेश बढ़ रहा है और नए नेतृत्व पर अंतरराष्ट्रीय भरोसा जगा है. मानवीय आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2024 के बाद से लगभग 16 लाख शरणार्थी और 20 लाख आंतरिक रूप से विस्थापित लोग वापस सीरिया लौट चुके हैं.

हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के डिप्टी स्पेशल एनवॉय क्लाउडियो कोर्डोन ने रिपोर्ट दी कि सीरिया सही दिशा में तो जा रहा है, लेकिन सुवेदा प्रांत में विश्वास बहाली के रोडमैप पर कोई खास प्रगति नहीं हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि सुवेदा में अलगाव की मांग सीरिया की एकता और अखंडता के लिए खतरा बन सकती है.