सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में दुनिया के सामने अपना रुख साफ कर दिया है। सऊदी अरब के प्रतिनिधि डॉ. Abdulaziz Alwasil ने कहा कि मिडिल ईस्ट में शांति के लिए फिलिस्तीन का मुद्दा सबसे जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश का बनना ही इस लंबे विवाद को खत्म करने का इकलौता रास्ता है।
दो राज्यों वाला समाधान और 1967 की सीमा
सऊदी अरब ने मांग की है कि फिलिस्तीन को एक अलग देश के रूप में मान्यता मिले। यह देश 4 जून 1967 की सीमाओं के आधार पर होना चाहिए और इसकी राजधानी पूर्वी यरूशलेम (East Jerusalem) होनी चाहिए। सऊदी अरब के अनुसार, जब तक यह समाधान लागू नहीं होता, तब तक इलाके में स्थायी शांति संभव नहीं है।
गाज़ा में मानवीय मदद पर जोर
UN सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक में सऊदी अरब ने गाज़ा की हालत पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गाज़ा में मानवीय मदद बिना किसी रोक-टोक के तुरंत पहुँचनी चाहिए। सऊदी प्रतिनिधि ने साफ तौर पर कहा कि मदद को राजनीतिक दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करना गलत है और इसे आम नागरिकों की सजा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन और अन्य देशों की भूमिका
- Arab Group: सऊदी अरब ने अरब देशों के समूह की तरफ से बस्तियों के विस्तार, जमीन कब्जाने और लोगों को जबरन हटाने का कड़ा विरोध किया।
- France: सऊदी अरब और फ्रांस ने मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें दुनिया के 142 देशों ने दो राज्यों वाले समाधान का समर्थन करते हुए न्यूयॉर्क घोषणा पत्र को मंजूरी दी थी।
- Mediation: सऊदी अरब ने गाज़ा में युद्धविराम शुरू करने के लिए अमेरिका, कतर, मिस्र और तुर्की द्वारा की गई कोशिशों की सराहना की।
सऊदी अरब ने UN सुरक्षा परिषद से अपनी जिम्मेदारी निभाने और अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने के लिए पुराने प्रस्तावों को लागू करने की अपील की है।