सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक बड़ी चेतावनी जारी की है। सऊदी के प्रतिनिधि ने कहा है कि अगर एनर्जी प्लांट और बुनियादी ढांचे पर हमले होते रहे, तो इसका असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ेगा। इससे न केवल तेल और गैस की किल्लत हो सकती है, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमी भी संकट में आ सकती है।

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एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का क्या असर होगा?

सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि डॉ. अब्दुलअज़ीज़ अल-वासल ने 16 मई 2026 को UN की एक खास मीटिंग में यह बात कही। उन्होंने बताया कि ऊर्जा केंद्रों और नागरिक ठिकानों पर हमले समुद्री रास्तों और ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा हैं। अगर ये हमले बढ़ते हैं, तो सामानों की आवाजाही रुक सकती है जिससे पूरी दुनिया में महंगाई और सामान की कमी हो सकती है। सऊदी अरब ने कहा कि वह ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर रखने और सप्लाई को सही तरीके से चलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कौन से समुद्री रास्ते हैं सबसे ज़्यादा ज़रूरी?

  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): यह रास्ता तेल के व्यापार के लिए बहुत अहम है।
  • बाब अल-मंडेब (Bab al-Mandab): यह भी एक प्रमुख समुद्री मार्ग है जहाँ से जहाजों का आना-जाना होता है।
  • सऊदी अरब ने इन रास्तों की सुरक्षा और जहाजों की आज़ाद आवाजाही को ग्लोबल इकोनॉमी के लिए ज़रूरी बताया है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहरीन का प्रस्ताव

डॉ. अल-वासल ने बहरीन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव नंबर 2817 का ज़िक्र किया। यह प्रस्ताव होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा और आज़ाद आवाजाही से जुड़ा है जिसे काफी समर्थन मिला है। सऊदी अरब ने जोर दिया कि दुनिया के सभी देशों को मिलकर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना चाहिए ताकि एनर्जी मार्केट स्थिर रहे। उन्होंने यह भी कहा कि विकासशील देशों को सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा मिलना ज़रूरी है ताकि वहां गरीबी कम हो सके और विकास हो सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सऊदी अरब ने यह चेतावनी कब और कहाँ दी?

यह चेतावनी 16 मई 2026 को संयुक्त राष्ट्र (UN) की आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) की एक विशेष बैठक के दौरान दी गई।

एनर्जी सप्लाई चेन पर असर क्यों पड़ेगा?

क्योंकि एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और मुख्य समुद्री रास्तों जैसे होर्मुज़ और बाब अल-मंडेब पर हमलों से तेल और गैस की सप्लाई रुक सकती है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।