खाड़ी देशों में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। सऊदी अरब की काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स ने क्राउन प्रिंस की अध्यक्षता में एक ज़रूरी बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि इलाके में शांति होनी चाहिए और पाकिस्तान की मदद से मामले को सुलझाया जाना चाहिए। खास तौर पर होरमुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को फिर से सामान्य बनाने पर ज़ोर दिया गया है।
तनाव क्यों बढ़ रहा है और क्या हुआ है
हाल ही में 4 मई 2026 को UAE ने दावा किया कि ईरान ने उसके इलाके में 15 मिसाइल और 4 ड्रोन दागे। उसी समय ईरान ने कहा कि उसने अमेरिकी युद्धपोतों को चेतावनी देने के लिए फायरिंग की थी। असल में यह विवाद 28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ, जिसके जवाब में ईरान ने होरमुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों का रास्ता रोका था। हालांकि 8 अप्रैल को पाकिस्तान की मदद से युद्धविराम हुआ था, लेकिन बातचीत से कोई पक्का समाधान नहीं निकला।
सऊदी अरब और पाकिस्तान का क्या रोल है
सऊदी अरब की काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स और विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इलाके में सैन्य तनाव कम होना चाहिए। सऊदी सरकार चाहती है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता फिर से वैसा ही हो जाए जैसा 28 फरवरी से पहले था, ताकि जहाजों का आना-जाना सुरक्षित रहे। इस बीच Pakistan इस विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री Mohammad Ishaq Dar ने 5 मई को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और जल्द ही कोई बड़ी प्रगति होने की उम्मीद है।
ईरान का ताज़ा रुख क्या है
दूसरी तरफ ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने 4 मई को होरमुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री नियंत्रण के नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। ईरान के संसद स्पीकर Mohammad-Bagher Ghalibaf ने 5 मई को कहा कि अमेरिका और उसके साथियों ने नाकाबंदी की है, जिससे ऊर्जा और समुद्री व्यापार के रास्ते में खतरा पैदा हो गया है। ईरान का मानना है कि अब इस क्षेत्र में एक नया संतुलन बन रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में क्या विवाद है
ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल के हमलों के जवाब में इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण कर लिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय जहाजों और तेल के परिवहन में बाधा आ रही है।
सऊदी अरब ने इस मामले में क्या मांग की है
सऊदी अरब ने तनाव कम करने, पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों का समर्थन करने और समुद्री मार्ग को फिर से सामान्य करने की अपील की है।