अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सऊदी अरब के साथ 30 साल लंबे नागरिक परमाणु सहयोग समझौते को मंजूरी दे दी है। इस समझौते का उद्देश्य सऊदी अरब में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करना है। The Wall Street Journal के अनुसार, यह डील सऊदी अरब में कुछ विशेष शर्तों के तहत यूरेनियम संवर्धन की अनुमति भी दे सकती है, जिसके लिए दोनों देशों के बीच एक संयुक्त अध्ययन किया जाएगा।
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क्या होगा इस समझौते का असर
इस प्रस्तावित समझौते को 123 Agreement के नाम से जाना जाता है, जो अमेरिका के Atomic Energy Act of 1954 की धारा 123 के तहत आता है। समझौते पर अमेरिका के ऊर्जा सचिव Chris Wright और सऊदी ऊर्जा मंत्री Prince Abdulaziz bin Salman ने हस्ताक्षर किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब के परमाणु बुनियादी ढांचे को विकसित करने में बड़ी भूमिका निभाएंगी।
संसद की मंजूरी का इंतजार
प्रशासन अब इस समझौते को अंतिम मंजूरी के लिए US Congress में पेश करने की तैयारी कर रहा है। सऊदी अरब के पास यूरेनियम के बड़े संसाधन मौजूद हैं और देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने की स्पष्ट रणनीति पर काम कर रहा है। एक बार संसद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह समझौता प्रभावी हो जाएगा।
