सऊदी अरब सरकार ने खाली पड़ी संपत्तियों के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। Ministry of Municipalities and Housing ने इस फैसले को मंजूरी दी है ताकि बाजार में घरों की कमी को दूर किया जा सके और जमीनों का सही इस्तेमाल हो। यह कदम क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निर्देशों पर उठाया गया है जिससे प्रॉपर्टी मार्केट में मांग और सप्लाई के बीच संतुलन बना रहे।

खाली प्रॉपर्टी पर शुल्क कब और कितना लगेगा?

नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई बिल्डिंग या प्रॉपर्टी एक साल के दौरान लगातार या अलग-अलग समय पर कुल 6 महीने तक खाली रहती है, तो उसे खाली माना जाएगा। ऐसी संपत्तियों पर सरकार शुल्क लगाएगी। यह नियम उन खास इलाकों में लागू होगा जिनकी घोषणा मंत्रालय द्वारा की जाएगी। इन इलाकों का चुनाव बाजार के हालात, प्रॉपर्टी की कीमतों और घरों की कमी को देखकर किया जाएगा। फाइनेंस मिनिस्टर मोहम्मद अल-जदान ने भी इस पहल का समर्थन किया है ताकि आम नागरिकों को किफायती घर मिल सकें और सट्टेबाजी पर रोक लगे।

प्रॉपर्टी टैक्स और नियमों की पूरी जानकारी

सरकार ने इस पूरे सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए कुछ कड़े नियम तय किए हैं। नीचे दी गई टेबल में आप समझ सकते हैं कि यह शुल्क कैसे काम करेगा:

नियम की जानकारी विवरण
खाली होने की समय सीमा साल में 6 महीने तक बिना इस्तेमाल के रहना
सालाना शुल्क की दर प्रॉपर्टी की वैल्यू का अधिकतम 5% तक
वैल्यूएशन का आधार फेयर मार्केट रेंटल वैल्यू (किराये का बाजार भाव)
पेमेंट का समय इनवॉइस मिलने के बाद 6 महीने का समय
लागू होने वाले क्षेत्र मंत्रालय द्वारा घोषित भौगोलिक क्षेत्र
मालिकों की जिम्मेदारी साझा मालिकाना हक होने पर हिस्से के हिसाब से भुगतान
पैसे का इस्तेमाल हाउसिंग प्रोजेक्ट और शहरी विकास के लिए

मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि अगर किसी वजह से मालिक के कंट्रोल के बाहर प्रॉपर्टी खाली रहती है, तो उन परिस्थितियों पर विचार किया जाएगा। इस कानून का मुख्य उद्देश्य आवासीय और कमर्शियल यूनिट्स की सप्लाई बढ़ाना है ताकि बाजार में कीमतों पर नियंत्रण रहे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सऊदी अरब में किस प्रॉपर्टी को ‘खाली’ माना जाएगा?

अगर कोई बिल्डिंग एक रेफरेंस साल के दौरान कुल 6 महीने (लगातार या अलग-अलग) तक इस्तेमाल नहीं होती है, तो उसे खाली माना जाएगा।

खाली प्रॉपर्टी पर कितना शुल्क देना होगा?

प्रॉपर्टी के फेयर मार्केट रेंटल वैल्यू के आधार पर सालाना 5% तक का शुल्क देना पड़ सकता है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.