नेशनल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल कंप्लायंस (NCEC) ने सऊदी अरब के अलग-अलग शहरों में हवा की क्वालिटी का ताजा आंकड़ा जारी किया है। 12 मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश के ज्यादातर शहरों में हवा बिल्कुल साफ है और वहां प्रदूषण का कोई खास खतरा नहीं है। हालांकि रियाद के एक इलाके, मदीना और हाइल में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों को थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग का कहना है कि इन जगहों पर धूल और प्रदूषण के कारण हवा की क्वालिटी में गिरावट दर्ज की गई है।

सऊदी के किन शहरों में हवा की स्थिति कैसी है

हवा की क्वालिटी को नापने के लिए NCEC ने अलग-अलग रंगों के आधार पर जोन बांटे हैं। इसके अनुसार शहरों को तीन मुख्य भागों में रखा गया है:

  • ग्रीन जोन (सुरक्षित हवा): सऊदी अरब के अधिकतर शहर इसी जोन में आते हैं। यहां की हवा साफ है और आम लोगों के स्वास्थ्य पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।
  • येलो जोन (हल्का प्रदूषण): मदीना और हाइल शहर को इस लिस्ट में रखा गया है। नेशनल सेंटर ऑफ मीटियोरोलॉजी (NCM) के अनुसार, हाइल में 40 से 49 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चली हैं। इस कारण हवा में धूल के कण (PM10) बढ़ गए हैं। यह हवा उन लोगों को थोड़ी परेशानी दे सकती है जो प्रदूषण को लेकर बहुत ज्यादा संवेदनशील हैं।
  • ऑरेंज जोन (खराब हवा): रियाद के अल-मुरुज (Al-Murooj) इलाके की हवा को ऑरेंज कैटेगरी में रखा गया है। प्रशासन की ओर से सलाह दी गई है कि इस इलाके में रहने वाले बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को बेवजह घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए।

हवा की जांच और नया पर्यावरण नियम

सऊदी अरब में हवा की क्वालिटी पर हर 5 मिनट में नजर रखी जा रही है। NCEC पूरे देश में 240 स्टेशनरी और मोबाइल स्टेशनों के जरिए हवा की जांच कर रहा है। NCEC के पर्यावरण डेटा निदेशक डॉ. मोहम्मद अल-दुघैरी की देखरेख में छह मुख्य प्रदूषकों की पहचान की जाती है। इनमें हवा में मौजूद बारीक कण (PM2.5 और PM10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और ओजोन शामिल हैं।

पर्यावरण कानून के तहत अब नियमों को और सख्त कर दिया गया है। ज्यादा भीड़ वाले और औद्योगिक इलाकों में प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की जा रही है। NCEC ने बताया है कि इस सीजन में मक्का और मदीना में औद्योगिक और सेवा सुविधाओं की जांच के लिए 367 विजिट किए जाएंगे। प्रदूषण कम करने के लिए इंस्पेक्शन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।