सऊदी अरब ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस फैसले का स्वागत किया है जिसमें उन्होंने ईरान के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता चुना है। इस कदम से पूरे इलाके में शांति की उम्मीद जगी है। साथ ही, सऊदी ने इस मामले में पाकिस्तान की मध्यस्थता की भी तारीफ की है जो क्षेत्रीय तनाव को कम करने की कोशिश कर रहा है।
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ट्रंप ने ईरान पर हमले का फैसला क्यों टाला?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 19 मई 2026 को बताया कि उन्होंने ईरान पर होने वाले एक नियोजित हमले को कुछ समय के लिए टाल दिया है। ट्रंप के अनुसार, सऊदी अरब, कतर और UAE ने अमेरिका से अनुरोध किया था कि कार्रवाई में कुछ दिनों की देरी की जाए क्योंकि बातचीत से समझौता होने की पूरी संभावना है। ट्रंप ने 17 मई को इस युद्धविराम को पाकिस्तान के लिए एक एहसान बताया और कहा कि फिलहाल उस देश पर बमबारी नहीं की जाएगी।
सऊदी अरब और पाकिस्तान की क्या भूमिका रही?
सऊदी विदेश मंत्री Faisal bin Farhan Al Saud ने कहा कि वे क्षेत्र में स्थिरता और Strait of Hormuz की सुरक्षा को वापस पुराने स्तर पर लाने की कोशिशों की सराहना करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब पाकिस्तान के उन प्रयासों की तारीफ करता है जो तनाव कम करने के लिए किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री Mohsin Naqvi सुरक्षा स्थिति पर चर्चा करने के लिए पाँच दिनों के भीतर दूसरी बार तेहरान पहुँचे।
ईरान का इस स्थिति पर क्या कहना है?
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि अमेरिका के व्यवहार और आपसी अविश्वास की वजह से बातचीत की प्रक्रिया कठिन हो गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस संकट को सुलझाने में चीन की भूमिका बढ़ाई जा सकती है। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि वे सम्मान के साथ सीधी बातचीत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे किसी दबाव में आकर कोई समझौता नहीं करेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ट्रंप ने ईरान पर हमला क्यों नहीं किया?
ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर और UAE के अनुरोध पर हमला टाल दिया क्योंकि इन देशों को लगा कि बातचीत के जरिए जल्द ही कोई डील हो सकती है।
पाकिस्तान इस विवाद में क्या कर रहा है?
पाकिस्तान एक मध्यस्थ के तौर पर काम कर रहा है। उसके आंतरिक मंत्री Mohsin Naqvi तेहरान जाकर क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर अहम चर्चा कर रहे हैं।
