सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में ईरान के हमलों की निंदा करने वाले प्रस्ताव का स्वागत किया है। यह प्रस्ताव परिषद के 61वें सत्र के दौरान 25 मार्च 2026 को सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर और जॉर्डन पर हुए हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन माना गया है।

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इस प्रस्ताव में क्या मुख्य बातें कही गई हैं?

संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव में ईरान द्वारा किए गए हमलों को राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमला बताया गया है। प्रस्ताव में मांग की गई है कि इन उल्लंघनों के लिए जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जाए। इस प्रस्ताव की कुछ जरूरी बातें नीचे दी गई हैं:

  • ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में डालने वाली गतिविधियों को बंद करने की मांग की गई है।
  • हमलों से हुए नुकसान की भरपाई और जिम्मेदारी लेने की बात कही गई है।
  • प्रभावित देशों को आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया गया है।
  • नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हमलों की कड़ी निंदा की गई है।

सऊदी अरब और खाड़ी सहयोग परिषद का रुख

सऊदी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एकजुटता को पेश करता है। मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष का हिस्सा न होने वाले देशों को निशाना बनाना एक गंभीर आक्रामकता है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। GCC के महासचिव जसीम मोहम्मद अल बुदैवी ने भी इस फैसले की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल क्षेत्रीय शांति बल्कि वैश्विक व्यापार मार्गों और समुद्री सुरक्षा की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। बहरीन ने इस प्रस्ताव को जॉर्डन और अन्य खाड़ी देशों की तरफ से परिषद के सामने पेश किया था।