सऊदी अरब ने अपने प्राकृतिक पर्यावरण और वन्यजीवों को बचाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। नेशनल सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ (NCW) के नेतृत्व में देश अब संरक्षण के नए आयाम स्थापित कर रहा है, जिसका मुख्य लक्ष्य साल 2030 तक 50 प्रजनन कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक संचालित करना है। वर्तमान में देश में 21 ऐसे कार्यक्रम पहले से ही चल रहे हैं। यह प्रयास सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव और विजन 2030 का हिस्सा है, जिसके तहत 2030 तक सऊदी अरब के 30% समुद्री और जमीनी इलाकों को संरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रकृति के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता
सऊदी अरब के पास 65 से अधिक पारिस्थितिकी तंत्र और करीब 12,000 प्रजातियां मौजूद हैं। NCW के सीईओ मोहम्मद कुर्बान के अनुसार, देश इन संसाधनों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह गंभीर है। हाल ही में, 16 जुलाई 2026 को इमाम अब्दुलअजीज बिन मोहम्मद रॉयल रिजर्व ने रेड-नेक्स्ड शुतुरमुर्ग के चूजों की संख्या बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है। साथ ही, 11-12 जून 2026 को ‘वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन’ नाम की एक नई पहल शुरू की गई है, जिससे लोग अब फरासान द्वीप जैसे संरक्षित क्षेत्रों में प्राकृतिक पर्यटन का आनंद ले सकते हैं।
वन्यजीवों के लिए कड़े नियम और राहत
सरकार ने वन्यजीवों के संरक्षण के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है। NCW ने अवैध वन्यजीव रखने वालों के लिए नियमितीकरण की तीसरी समयसीमा को 30 जून 2026 तक बढ़ाया था, ताकि लोग कानूनी तौर पर अपने पास मौजूद जीवों को दर्ज करवा सकें। इसके अलावा, इमाम तुर्की बिन अब्दुल्ला रॉयल नेचर रिजर्व में 2026 की पहली तिमाही में 17 जंगली खरगोशों का जन्म हुआ, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।
सफलता का आंकड़ा
सऊदी अरब ने अब तक 10,000 से ज्यादा मूल जानवरों, जैसे अरब ओरिक्स, रीम गज़ेल और होबारा बस्टर्ड को उनके प्राकृतिक आवासों में वापस छोड़ा है। वर्तमान में सऊदी अरब के कुल क्षेत्रफल का 18.3% हिस्सा और समुद्री क्षेत्र का 16.3% हिस्सा संरक्षित नेटवर्क के दायरे में आता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सऊदी अरब के इन प्रयासों को काफी सराहा जा रहा है।
