सऊदी अरब ने एक बार फिर दुनिया को अपनी तकनीकी ताकत दिखाई है। देश ने लगातार तीसरे साल ग्लोबल साइबर सुरक्षा इंडेक्स में पहला स्थान हासिल किया है। 18 जून 2026 को आई इस रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया कि डिजिटल सुरक्षा के मामले में सऊदी अरब दुनिया के बाकी देशों से काफी आगे निकल चुका है।

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यह उपलब्धि स्विट्जरलैंड के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मैनेजमेंट डेवलपमेंट (IMD) के वर्ल्ड कॉम्पिटिटिवनेस सेंटर द्वारा जारी की गई 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में सामने आई है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र (UN) और उसकी एजेंसी ITU ने भी सऊदी अरब को इस क्षेत्र में एक रोल मॉडल के रूप में देखा है।

नेतृत्व और संस्थाओं का योगदान

नेशनल साइबर सिक्योरिटी अथॉरिटी (NCA) ने एक बयान में बताया कि यह सफलता किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के समर्थन की वजह से मिली है। सऊदी अरब ने साइबर सुरक्षा के लिए NCA को मुख्य एजेंसी बनाया है और ‘साइट’ (site) कंपनी को तकनीकी पार्टनर के तौर पर जोड़ा है, जिससे देश का सुरक्षा ढांचा और मजबूत हुआ है।

NCA के गवर्नर इंजीनियर माजिद बिन मोहम्मद अल-मजीद ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने रियाद को अपनी ट्रेनिंग और रिसर्च इंस्टीट्यूट (UNITAR) के पहले साइबर सुरक्षा ऑफिस के लिए चुना है। यह फैसला सऊदी अरब की इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ को बताता है।

निवेश और आने वाले कार्यक्रम

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सऊदी अरब ने निवेश के मामले में भी बड़ी बढ़त बनाई है। आंकड़ों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) क्षेत्र में साइबर सुरक्षा कंपनियों में होने वाले कुल वेंचर कैपिटल निवेश का 87.6% हिस्सा अकेले सऊदी अरब के पास गया, जिसकी कीमत लगभग 87.6 मिलियन डॉलर है।

  • तारीख: 18 जून 2026 को रैंकिंग का ऐलान हुआ।
  • रिपोर्ट: IMD स्विट्जरलैंड की वर्ल्ड कॉम्पिटिटिवनेस रिपोर्ट 2026।
  • निवेश: 87.6 मिलियन डॉलर का निवेश मिला।
  • विशेष उपलब्धि: UN का पहला UNITAR साइबर ऑफिस अब रियाद में होगा।

अब रियाद में 18 से 20 दिसंबर 2026 के बीच ग्लोबल सिक्योरिटी एंड टेक्नोलॉजी समिट (GSTS) का आयोजन होगा। यह समिट क्राउन प्रिंस की देखरेख में होगा, जिसका मकसद डिजिटल सुरक्षा को और बेहतर बनाना और सरकारी विभागों में डिजिटल बदलाव लाना है।