सऊदी अरब अब दुनिया में टेक्नोलॉजी की ताकत बनने की तैयारी में है. सरकार ने साल 2026 को Year of Artificial Intelligence यानी एआई का साल घोषित कर दिया है. इसका असर आने वाले समय में फैक्ट्रियों और डेटा स्टोर करने के तरीकों पर दिखेगा. यह सब सऊदी विज़न 2030 का हिस्सा है ताकि देश की कमाई के नए रास्ते खुल सकें.

एआई और डेटा सेंटर के लिए क्या तैयारी की गई है?

सऊदी अरब ने एआई टेक्नोलॉजी और डेटा सेंटर को बढ़ाने के लिए 55 अरब सऊदी रियाल (करीब 15 अरब डॉलर) का निवेश किया है. साल 2024 तक देश की क्षमता बढ़कर 290.5 मेगावाट हो गई थी. इसी कड़ी में साल 2026 की शुरुआत में Hexagon डेटा सेंटर शुरू हुआ, जो दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी डेटा सेंटर माना जाता है और इसकी क्षमता 480 मेगावाट है. इसके अलावा Microsoft ने भी कन्फर्म किया है कि उनका डेटा सेंटर रीजन 2026 की आखिरी तिमाही से ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगा.

स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेनिंग से क्या बदलेगा?

देश में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग के मार्केट में 2026 से 2034 के बीच 40.56 प्रतिशत की सालाना बढ़त होने की उम्मीद है. सरकार चाहती है कि फैक्ट्रियों में ऑटोमेशन और डेटा के इस्तेमाल से काम आसान और तेज़ हो. लोगों को तैयार करने के लिए 11,000 से ज़्यादा विशेषज्ञों को ट्रेनिंग दी गई है और SAMAI प्रोग्राम से 10 लाख से ज़्यादा लोग जुड़े हैं. 2025 के ग्लोबल एआई इंडेक्स में सऊदी अरब 14वें नंबर पर रहा है.

विवरण जानकारी
कुल निवेश 55 अरब रियाल
2024 की क्षमता 290.5 मेगावाट
Hexagon सेंटर क्षमता 480 मेगावाट
स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 40.56% (CAGR)
ग्लोबल एआई रैंक 14वां स्थान
एआई कंपनियों की फंडिंग 9.1 अरब डॉलर
ट्रेनिंग पाने वाले एक्सपर्ट 11,000 से ज़्यादा