दुनिया इस वक्त ऊर्जा के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। सऊदी अरामको के प्रेसिडेंट और सीईओ Amin Nasser ने बताया कि पिछले दो महीनों में दुनिया ने करीब एक अरब बैरल तेल खो दिया है। यह स्थिति मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के रास्ते बंद होने की वजह से पैदा हुई है।

दुनिया में तेल की कितनी कमी हुई और क्यों

सऊदी अरामको के सीईओ Amin Nasser और Shell के सीईओ Wael Sawan दोनों ने पुष्टि की है कि दुनिया में लगभग एक अरब बैरल तेल की कमी आई है। International Energy Agency (IEA) ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक बताया है। इसका मुख्य कारण ईरान, अमेरिका और इसराइल के बीच चल रहा युद्ध है जिसकी वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का रास्ता बंद हो गया है, जो तेल सप्लाई का एक बहुत जरूरी रूट है।

कीमतों में कितनी बढ़ोत्तरी होगी और सऊदी का क्या प्लान है

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक अगर मिडिल ईस्ट का विवाद मई 2026 तक खत्म होता है, तो भी साल 2026 में कमोडिटी की कीमतों में 16 प्रतिशत और ग्लोबल एनर्जी की कीमतों में 24 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है। अरामको ने इस संकट को कम करने के लिए अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का इस्तेमाल शुरू किया है। यह पाइपलाइन 70 लाख बैरल प्रतिदिन की अधिकतम क्षमता से तेल को रेड सी की तरफ भेज रही है ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर निर्भरता कम हो सके। Amin Nasser ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो मार्केट को वापस सामान्य होने में 2027 तक का समय लग सकता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

तेल की कमी का मुख्य कारण क्या है

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के बंद होने की वजह से तेल की सप्लाई रुक गई है, जिससे पिछले दो महीनों में करीब एक अरब बैरल तेल कम हुआ है।

ऊर्जा की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा

वर्ल्ड बैंक के अनुमान के अनुसार साल 2026 में ग्लोबल एनर्जी की कीमतों में 24 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है।