सऊदी अरामको ने बुधवार, 11 फरवरी 2026 को ऐलान किया कि उनके iktva प्रोग्राम ने सप्लाई चेन में 70 प्रतिशत लोकुलाइजेशन का टार्गेट हासिल कर लिया है। कंपनी ने अब 2030 तक इसे 75 प्रतिशत तक ले जाने का नया लक्ष्य रखा है। यह प्रोग्राम सऊदी अरब की इकोनॉमी को मजबूत करने में बहुत बड़ा रोल निभा रहा है और इससे स्थानीय स्तर पर काम बढ़ रहा है।

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iktva प्रोग्राम से आम लोगों और देश को क्या मिला?

जब से यह प्रोग्राम शुरू हुआ है, इसने सऊदी अरब की जीडीपी में 280 बिलियन डॉलर का बड़ा योगदान दिया है। सबसे अच्छी खबर यह है कि इससे देश में 2 लाख से ज्यादा नई नौकरियां पैदा हुई हैं। बाहर के 35 देशों से 350 से ज्यादा निवेश आए हैं। इससे 47 ऐसे जरूरी प्रोडक्ट्स अब सऊदी में ही बनने लगे हैं जो पहले बाहर से आते थे। इस प्रोग्राम ने 9 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश भी खींचा है।

सप्लायर्स और कंपनियों के लिए क्या हैं नियम?

अरामको के साथ काम करने वाली कंपनियों के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। उनका स्कोर इस बात पर तय होता है कि वे लोकल लेवल पर कितना काम करते हैं। कंपनियों को एक सर्वे भरना होता है और अरामको के साथ मिलकर 5 साल का एक्शन प्लान देना होता है। इसमें देखा जाता है कि वे सऊदी लोगों को कितनी सैलरी दे रहे हैं और लोकल ट्रेनिंग पर कितना खर्च कर रहे हैं।

प्रोग्राम की मुख्य बातें:

कुल नई नौकरियां 2,00,000+
जीडीपी में योगदान $280 बिलियन
विदेशी निवेश (FDI) $9 बिलियन
सऊदी अरामको शेयर (2222.SR) 25.80 SAR