Saudi Arabia: हूती के हमले से सऊदी अरामको की जिजान रिफाइनरी को भारी नुकसान, आग बुझी लेकिन उत्पादन शुरू करने की तारीख बढ़ाई गई.

सऊदी अरब की राष्ट्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस कंपनी Saudi Aramco की Jizan Refinery पर हुए हमले का असर अभी भी खत्म नहीं हुआ है। हालांकि सुरक्षा टीमों ने रिफाइनरी में लगी आग को पूरी तरह से बुझा लिया है, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने इस महत्वपूर्ण रिफाइनरी को दोबारा शुरू करने की मियाद को आगे बढ़ा दिया है। यह रिफाइनरी दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब में स्थित है और पिछले महीने यानी 27 July से पूरी तरह बंद पड़ी है। इस हमले के दौरान आग लगने से इंटीग्रेटेड गैसीफिकेशन कंबाइंड-साइकिल कॉम्प्लेक्स और टैंक फार्म को भारी नुकसान पहुंचा था, जिसकी वजह से ऊर्जा क्षेत्र में चिंता बनी हुई है।
उत्पादन क्षमता और नया शेड्यूल
यमन प्रेस एजेंसी यानी YPA और Arab News की रिपोर्ट के मुताबिक, अंदरूनी सूत्रों ने दावा किया है कि इस रिफाइनरी को अब 30 August तक शुरू करने की संभावित तारीख तय की गई है। इससे पहले कंपनी का लक्ष्य अगस्त के मध्य तक इसे चालू करने का था। आपको बता दें कि जिजान रिफाइनरी सऊदी अरब के ऊर्जा बाजार के लिए बहुत ही ज्यादा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसकी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 400,000 barrels per day है और देश के घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सुचारू रूप से बनाए रखने में इसकी बहुत बड़ी भूमिका है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी कि अरामको की इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फायर फाइटिंग टीमों ने आग पर पूरी तरह काबू पा लिया है, लेकिन उन्होंने दोबारा चालू होने की कोई आधिकारिक समय-सीमा नहीं बताई है।
हूती विद्रोहियों ने ली हमले की जिम्मेदारी
चरमपंथी संगठन हूती यानी Ansar Allah ने बीते 9 August को जिजान रिफाइनरी पर हमला करने की आधिकारिक जिम्मेदारी ली थी। संगठन का कहना था कि यह कार्रवाई यमन के सादा और हज्जा प्रांतों पर हुए सऊदी ड्रोन हमलों के जवाब में की गई थी। जानकारी के लिए बता दें कि हूती यमन का एक सैन्य और राजनीतिक संगठन है, जो मुख्य रूप से उत्तरी यमन के जैदी शिया मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करता है और इसे सीधे तौर पर ईरान का समर्थन हासिल है। अमेरिका, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश इसे पहले ही आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं। हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद इस हमले को अंजाम दिया गया है, जिसके बाद सऊदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन विद्रोहियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील की है।
यमन के दूसरे इलाकों में भी जारी है संघर्ष
दूसरी तरफ, यमन सरकार की समर्थक सेना ने यह भी दावा किया है कि हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के बंदरगाह शहर अल-मखा यानी Mocha पर एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं और वहां की पोर्ट सुविधाओं को निशाना बनाया है। इस गोलाबारी में कम से कम दो यमन के सरकारी सैनिक मारे गए हैं। इसके अलावा मारिब सीमा के पास नजद मरगाद में शबवा डिफेंस फोर्सेज की एक चौकी पर भी ड्रोन हमला किया गया, जिसमें दो जवान अपनी जान गंवा बैठे और कई अन्य घायल हो गए। दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में भी लगातार गोलीबारी की आवाजें सुनी जा रही हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का मुख्य केंद्र है। यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन Dr. Rashad al-Alimi ने रियाद में बोलते हुए कहा कि ईरान समर्थित इन आतंकवादियों को अब सभी देशों को मिलकर एकजुटता के साथ करारा जवाब देना चाहिए।