सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान बिन अब्दुल्ला और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के बीच रियाद में एक अहम बैठक हुई। इस मीटिंग में दोनों देशों ने अपने रिश्तों को और मजबूत बनाने और दुनिया की शांति पर चर्चा की। यह बातचीत 30 मार्च 2026 को हुई थी जिसके बारे में जानकारी अब सामने आई है।
सऊदी और कनाडा किन क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे?
दोनों देशों के बीच रिश्ते 50 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। इस बैठक में बातचीत हुई कि आने वाले समय में दोनों देश व्यापार, निवेश, स्पेस (अंतरिक्ष), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), माइनिंग, टूरिज्म, एजुकेशन और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। दोनों मंत्रियों ने माना कि आर्थिक विविधता और सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के लिए जरूरी है।
ईरान की हरकतों पर क्या कड़ा रुख अपनाया गया?
मीटिंग का एक बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय चुनौतियों पर आधारित था। दोनों मंत्रियों ने ईरान की उन हरकतों की कड़ी निंदा की जिससे इलाके में अस्थिरता फैल रही है। सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए ईरान से तुरंत हमले रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने की मांग की गई।
- ईरान को UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का पालन करने को कहा गया।
- अरब देशों में सक्रिय मिलिशिया को हथियार, पैसा और समर्थन देना बंद करने की बात कही गई।
- अच्छे पड़ोसी होने के सिद्धांतों का सम्मान करने पर जोर दिया गया।
कनाडा ने सऊदी अरब के प्रति क्या आभार जताया?
कनाडा ने सऊदी अरब के साथ अपनी एकजुटता जाहिर की। कनाडा सरकार ने अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस भेजने में मदद करने के लिए सऊदी अरब का शुक्रिया अदा किया। कनाडा ने यह भी साफ किया कि वह खाड़ी और मिडिल ईस्ट में शांति बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए सऊदी अरब के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सऊदी और कनाडा की बैठक कब और कहाँ हुई थी?
यह बैठक 30 मार्च 2026 को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में आयोजित की गई थी।
बैठक में ईरान के मुद्दे पर क्या चर्चा हुई?
दोनों देशों ने ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए गए हमलों की निंदा की और उसे UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) को मानने तथा मिलिशिया की मदद बंद करने को कहा।