सऊदी अरब ने शराब बिक्री से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए अब चुनिंदा गैर-मुस्लिम विदेशी निवासियों के लिए शराब खरीदने की सीमित अनुमति दे दी है। यह सुविधा केवल उन प्रवासी गैर-मुस्लिमों को मिलेगी जिनकी मासिक आय कम से कम 50,000 रियाल (लगभग 11–12 लाख रुपये) या इससे अधिक है।​

नई नीति के मुख्य बिंदु

  • राजधानी रियाद में मौजूद देश की एकमात्र लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकान को अब विदेशी राजनयिकों के साथ-साथ उच्च आय वर्ग के गैर-मुस्लिम प्रवासी निवासियों के लिए भी खोल दिया गया है।​

  • दुकान में प्रवेश और खरीदारी के लिए विदेशी निवासियों को अपनी राष्ट्रीय पहचान संख्या के साथ वेतन प्रमाणपत्र या सैलरी स्लिप दिखाकर आय का सबूत देना अनिवार्य होगा।​

  • प्रत्येक पंजीकृत ग्राहक पर एक पॉइंट-आधारित मासिक लिमिट लागू होगी, यानी तय सीमा से अधिक शराब नहीं खरीदी जा सकेगी और पूरी खरीदारी डिजिटल सिस्टम से ट्रैक होगी।​

पृष्ठभूमि और वजह

सऊदी अरब दशकों से शराब पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध वाला देश रहा है और यहां शराब पीना, बेचना या घरों में रखना कड़ी सजा के दायरे में आता है।​

हाल के वर्षों में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के विज़न 2030 के तहत सामाजिक और आर्थिक सुधारों की श्रृंखला जारी है, जिसमें महिलाओं के ड्राइविंग अधिकार, मनोरंजन सेक्टर का विस्तार और पर्यटन बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।​

विश्लेषकों के मुताबिक उच्च आय वाले प्रवासियों और निवेशकों को आकर्षित करने, प्रीमियम रेज़िडेंसी वीज़ा धारकों को अतिरिक्त सुविधाएं देने और अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स जैसे एक्सपो 2030 व फुटबॉल विश्व कप 2034 की तैयारी के मद्देनज़र शराब नीति में यह सीमित ढील दी जा रही है।​

सीमाएं और कानूनी सख्ती जारी

  • यह छूट केवल गैर-मुस्लिम विदेशी निवासियों तक सीमित है; सऊदी नागरिकों और मुसलमानों के लिए शराब पर प्रतिबंध पहले की तरह ही लागू रहेगा।​

  • शराब की बिक्री अभी सिर्फ लाइसेंस प्राप्त आउटलेट पर ही होगी; सार्वजनिक स्थानों, सड़कों, सामान्य दुकानों, रेस्तरां और घरों में शराब की खरीद-फरोख्त और सेवन पर प्रतिबंध बरकरार है।​

  • नियमों के उल्लंघन पर कठोर दंड, जुर्माना और संभावित निर्वासन जैसी कार्रवाई की व्यवस्था भी बरकरार रखी गई है, ताकि सामाजिक और धार्मिक मानकों के साथ कोई टकराव न हो।​

प्रतिक्रियाएं और संभावित असर

सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है; कई लोग इसे “अमीर विदेशियों के लिए शराब नीति” कह रहे हैं, तो कुछ इसे सऊदी समाज के तेज़ी से बदलते चरित्र की मिसाल मान रहे हैं।​

समर्थक वर्ग का मानना है कि नियमन के दायरे में सीमित शराब बिक्री से अवैध तस्करी में कमी आएगी और उच्च वर्ग के प्रवासियों को नियंत्रित विकल्प मिलेगा।​

धार्मिक एवं परंपरावादी हलकों में आशंका जताई जा रही है कि यह कदम आगे चलकर और व्यापक उदारीकरण का रास्ता खोल सकता है, हालांकि सरकार की ओर से आधिकारिक स्तर पर अभी तक किसी बड़े कानून परिवर्तन की सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है।​

भारतीय और खाड़ी प्रवासियों पर प्रभाव

खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए तत्काल प्रभाव सीमित है, क्योंकि यह सुविधा सिर्फ गैर-मुस्लिम, उच्च आय वाले और प्रीमियम रेज़िडेंसी जैसे विशेष स्टेटस रखने वाले प्रवासियों के लिए है।​

श्रमिक और मध्यम आय वर्ग के अधिकांश विदेशी कर्मचारियों तक यह व्यवस्था नहीं पहुंचेगी, लेकिन नीति बदलाव को खाड़ी क्षेत्र की व्यापक सामाजिक-आर्थिक रूपांतरण प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जो भविष्य में रोजगार, पर्यटन और निवेश के अवसरों को प्रभावित कर सकती है।