सऊदी अरब अपने देश में पानी की किल्लत को दूर करने और बेहतर तकनीक लाने के लिए बड़े कदम उठा रहा है। इसके लिए सऊदी वाटर अथॉरिटी ने चीन के वैज्ञानिकों के साथ एक बड़ा समझौता किया है। इस साझेदारी से सऊदी में पानी के उत्पादन और उसके रखरखाव के लिए नई और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा।

15 जून 2026 को बीजिंग में सऊदी वाटर अथॉरिटी (SWA) और चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के एनवायर्नमेंटल साइंस रिसर्च सेंटर के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर साइन हुए। इस समझौते का मुख्य मकसद पानी की तकनीक में रिसर्च को बढ़ावा देना और एक-दूसरे के अनुभव से सीखना है। इस पूरी प्रक्रिया में सऊदी वाटर अथॉरिटी की रिसर्च विंग ‘वाटिरा’ (WATIRA) मुख्य भूमिका निभाएगी ताकि नई तकनीकों को स्थानीय स्तर पर लागू किया जा सके।

इस साझेदारी में किन बातों पर ध्यान दिया जाएगा

  • समुद्र के पानी को पीने लायक बनाने (desalination) के लिए नए और एडवांस मैम्ब्रेन और मटेरियल तैयार करना।
  • पानी को साफ करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों पर रिसर्च करना।
  • दोनों देशों के बीच रिसर्च प्रोजेक्ट्स को मिलकर चलाना।
  • विशेषज्ञों और रिसर्चर्स की अदला-बदली करना ताकि दोनों देशों को फायदा हो।
  • ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाना जिससे कर्मचारियों की काबिलियत बढ़ सके।
  • पानी के उत्पादन और ट्रीटमेंट में बिजली की खपत कम करने वाले तकनीकी समाधान खोजना।

यह कदम सऊदी विजन 2030 के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में उठाया गया है ताकि पर्यावरण की रक्षा हो सके और तकनीक में सऊदी अरब दुनिया में आगे रहे।

पानी की सुरक्षा के लिए अन्य बड़े कदम

सऊदी अरब केवल इसी एक समझौते तक सीमित नहीं है। इससे पहले 30 अक्टूबर 2025 को सऊदी वाटर अथॉरिटी ने चीनी कंपनी ‘शेनझेन वाटर’ के साथ राबिघ के ‘वाटर ओएसिस’ में एक रिसर्च सेंटर खोलने का फैसला किया था। इसके अलावा, ACWA Power ने 27 मई 2026 को चीन में 30 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है, जिसमें मुख्य रूप से उत्तर चीन के शहरों में समुद्री पानी को साफ करने के प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।

पानी की तकनीक और नवाचार को और बढ़ावा देने के लिए सऊदी अरब 7 से 9 दिसंबर 2026 तक जेद्दा में ‘इनोवेशन ड्रिवन वाटर सस्टेनेबिलिटी कॉन्फ्रेंस (IDWS) 2026’ का आयोजन भी करेगा।