कुवैत और अन्य क्षेत्रीय देशों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों के बाद तनाव काफी बढ़ गया है। 18 जुलाई 2026 को सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस Faisal bin Farhan ने कुवैत के अपने समकक्ष से फोन पर बात की और इन हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने ईरान की इन हरकतों को ‘पापपूर्ण आक्रामकता’ करार दिया है।

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कुवैत के रक्षा तंत्र ने सक्रिय होकर जवाबी कार्रवाई की

कुवैत की सेना के अनुसार, ईरानी ड्रोनों और मिसाइलों ने कुवैत के सैन्य शिविरों और सुविधाओं को निशाना बनाया, जिससे कई सैनिक घायल हो गए। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि इन हमलों में नागरिक ठिकानों, एक वॉटर डेसालिनेशन प्लांट और तेल सुविधाओं को भी नुकसान पहुँचा है। हमलों के कारण कुवैत के हवाई क्षेत्र को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था।

सऊदी अरब और GCC ने दी सख्त चेतावनी

सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि ईरान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों के सिद्धांतों के खिलाफ है। सऊदी सरकार ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए ईरान को इन हमलों को तुरंत रोकना चाहिए। उधर, Gulf Cooperation Council (GCC) के महासचिव ने इन हमलों को ‘युद्ध अपराध’ बताया है।

इन हमलों के प्रभाव केवल कुवैत तक सीमित नहीं रहे, बल्कि जॉर्डन और बहरीन ने भी अपने रक्षा तंत्र द्वारा ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराने की सूचना दी है। United States की सेना ने भी ईरान के खिलाफ लगातार सातवीं रात स्ट्राइक करने की पुष्टि की है। सऊदी अरब ने जोर देकर कहा कि ईरान को United Nations Security Council Resolution No. 2817 (2026) का पालन करना चाहिए।

Sushma Kumari

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