सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के बीच फोन पर खास बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते पर चर्चा की और इस बात पर जोर दिया कि इससे पूरे इलाके में सुरक्षा और स्थिरता आएगी। यह बातचीत अंतरराष्ट्रीय स्थितियों और क्षेत्रीय शांति को बेहतर बनाने के लिए की गई।

बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने 17 जून 2026 को साइन हुए ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) पर चर्चा की। इस समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का मुख्य मकसद 2026 के ईरान युद्ध को खत्म करना और भविष्य के रिश्तों के लिए एक रास्ता बनाना है।

इस समझौते की कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगियों के बीच सभी सैन्य अभियान तुरंत और हमेशा के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
  • अमेरिका ईरान के तेल निर्यात, बैंकिंग लेनदेन और जमी हुई संपत्तियों पर लगी पाबंदियां हटाएगा।
  • ईरान ने वादा किया है कि वह फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों के आने-जाने के रास्ते को सुरक्षित रखेगा।
  • दोनों पक्ष लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे।

इस पूरे समझौते में पाकिस्तान ने मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जिसमें सऊदी अरब, कतर, तुर्की और मिस्र ने भी सहयोग दिया। अब अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और बाध्यकारी समझौते पर बातचीत पूरी होगी, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इस समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति के लिए बहुत जरूरी था। हालांकि, फ्रांस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन को लेकर अपनी चिंताएं भी जताई हैं और एक पारदर्शी समझौते की मांग की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से मध्य पूर्व में ताकत का संतुलन बदल सकता है और ईरान और सऊदी अरब के बीच सहयोग और गहरा हो सकता है।