Saudi Arabia Defence: सऊदी क्राउन प्रिंस ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर से की अहम मुलाकात, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर हुई चर्चा.

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में रक्षा और कूटनीति के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी बैठक हुई है, जिसमें मिडिल ईस्ट क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर कई अहम मुद्दों पर खुलकर बातचीत की गई। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 13 अगस्त 2026 को अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के साथ आधिकारिक बैठक की। इस उच्च स्तरीय मुलाकात का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच डिफेंस यानी रक्षा संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना था ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम रखी जा सके।
क्षेत्रीय तनाव को कम करने और सुरक्षा बढ़ाने पर जोर
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव को कम करने के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया। क्षेत्रीय सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों की समीक्षा की गई। इस उच्च स्तरीय सत्र में दोनों देशों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में सऊदी अरब के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल फय्याद बिन हामिद अल-रुवैली और अमेरिका की चार्ज डी अफेयर्स एलिसन डिल्वर्थ ने भी हिस्सा लिया। इन तमाम बड़े अधिकारियों ने दोनों देशों के आपसी संबंधों और हालिया क्षेत्रीय विकास पर विस्तार से चर्चा की।
नई सैन्य पहलों और बहुपक्षीय रक्षा समन्वय का ऐलान
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी सैन्य नेतृत्व द्वारा क्षेत्र में लगातार नई रणनीतिक पहल की जा रही हैं। हाल ही में सेंट्रल कमांड ने "टास्क फोर्स फाल्कन स्ट्राइक" नाम से एक बहुपक्षीय अटैक ड्रोन पहल शुरू करने की घोषणा की है। इस नई पहल का मुख्य मकसद मानवरहित प्रणालियों यानी ड्रोन तकनीक को क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ जोड़ना और सुरक्षा को पुख्ता करना है। इस पूरी घटना की विस्तृत जानकारी Saudi Press Agency (SPA) के माध्यम से साझा की गई है।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के साथ इस बैठक के समानांतर सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने भी इराक के सशस्त्र बलों के कमांडर जनरल अब्दुल अमीर अल-शम्मारी से मुलाकात की। इस मुलाकात से यह साफ पता चलता है कि रियाद सरकार केवल एक देश तक सीमित न रहकर कई मोर्चों पर आपसी रक्षा सहयोग को बढ़ावा दे रही है। खाड़ी देशों में चल रही इन गतिविधियों का असर उन तमाम प्रवासियों और कामगारों पर भी पड़ता है जो रोजी-रोटी के सिलसिले में इन देशों में रहते हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत होने से यहाँ रहने वाले लोगों के लिए भी माहौल सुरक्षित और स्थिर बनता है।