Saudi Arabia News: सऊदी क्राउन प्रिंस और ब्रिटिश पीएम के बीच हुई बड़ी बातचीत, ईरान के हमलों की हुई कड़ी निंदा
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer के बीच 25 मार्च 2026 को फोन पर अहम बातचीत हुई है। इस दौरान दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और इसके ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब की सीमा में हो रहे हमलों की निंदा करते हुए किंगडम को सुरक्षा का पूरा भरोसा दिया है। यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में शांति और समुद्री व्यापार को लेकर कई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
ब्रिटिश पीएम और सऊदी क्राउन प्रिंस की बातचीत में क्या खास रहा?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने स्पष्ट रूप से कहा कि सऊदी अरब पर हो रहे हमले सुरक्षा और स्थिरता के लिए बड़े खतरे हैं। उन्होंने इन हमलों को अस्वीकार्य बताया और कहा कि ब्रिटेन सऊदी अरब की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में तनाव कम करना ज़रूरी है ताकि अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन और वैश्विक शांति बनी रहे। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने भी हाल ही में 23 और 24 मार्च को पूर्वी क्षेत्र में ड्रोन हमलों को रोकने की जानकारी साझा की है।
क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर किए गए मुख्य दावे और समर्थन
इस फोन कॉल के अलावा पिछले कुछ दिनों में कई बड़े देशों ने सऊदी अरब के प्रति अपना समर्थन जताया है। इसकी जानकारी नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती है:
| तारीख | देश/नेता | मुख्य संदेश |
|---|---|---|
| 25 मार्च 2026 | पाकिस्तान (Shahbaz Sharif) | सऊदी अरब पर हमलों की निंदा और क्षेत्रीय विकास पर चर्चा। |
| 23 मार्च 2026 | फ्रांस (Emmanuel Macron) | सऊदी अरब के साथ एकजुटता और हमलों का विरोध। |
| 19 मार्च 2026 | ब्रिटेन और सहयोगी देश | गैस और तेल ठिकानों पर हमलों की निंदा और नियमों के पालन की अपील। |
| 7 मार्च 2026 | ब्रिटेन | सऊदी की मदद के लिए सैन्य सामान और फाइटर जेट भेजने का ऐलान। |
इस तनावपूर्ण स्थिति का सीधा असर खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और वहां के व्यापारिक माहौल पर पड़ता है। सुरक्षा और स्थिरता बढ़ने से कारोबार और सामान्य जीवन में सुधार की उम्मीद रहती है। सऊदी अरब और उसके सहयोगी देश अब समुद्री रास्तों की सुरक्षा बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं ताकि तेल और गैस की सप्लाई में कोई रुकावट न आए और वैश्विक बाजार सुरक्षित रहे।





