सऊदी अरब अपनी खेती और पोल्ट्री सेक्टर को सुधारने के लिए नीदरलैंड के साथ मिलकर काम कर रहा है। दोनों देशों ने पोल्ट्री वेस्ट मैनेजमेंट और खेती की पैदावार बढ़ाने के लिए हाथ मिलाया है। यह कदम सऊदी विजन 2030 का हिस्सा है ताकि देश में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो सके और खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके।
सऊदी और नीदरलैंड के बीच क्या समझौता हुआ?
सऊदी अरब के पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय और नीदरलैंड के कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य सुरक्षा और प्रकृति मंत्रालय के बीच एक समझौता हुआ था। इस 5 साल के एमओयू (MoU) पर जून 2025 में हस्ताक्षर किए गए थे और यह 2026 से लागू हुआ है। जून 2025 में सऊदी के उप मंत्री इंजीनियर मंसूर अल-मुशैती की नीदरलैंड यात्रा के दौरान कुल 27 समझौते हुए, जिनमें 428 मिलियन सऊदी रियाल (लगभग 114.1 मिलियन डॉलर) से अधिक का निवेश शामिल है।
खेती और पशुपालन में कौन से बड़े बदलाव आएंगे?
- पोल्ट्री वेस्ट मैनेजमेंट: मुर्गियों के अपशिष्ट (waste) को सही तरीके से मैनेज कर उसे खेती में इस्तेमाल किया जाएगा।
- आलू की खेती: मार्च 2026 में 76 मिलियन रियाल से ज्यादा का एक सौदा हुआ, जिससे आलू की खेती बढ़ेगी और फ्रेंच फ्राइज बनाने की फैक्ट्री लगाई जाएगी।
- नई तकनीक: ग्रीनहाउस खेती, पानी बचाने के नए तरीके और फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए डच तकनीक का इस्तेमाल होगा।
- रिसर्च: पशुओं की बीमारियों से लड़ने और कीट नियंत्रण के लिए बायोटेक्नोलॉजी पर रिसर्च की जाएगी।
इस प्रोजेक्ट में कौन सी संस्थाएं शामिल हैं?
इस बड़े काम में सऊदी की तरफ से पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय (MEWA), एस्टिदामाह (Estidamah) और सऊदी एग्रीफूड टेक एलायंस (SAFTA) जैसी संस्थाएं जुड़ी हैं। वहीं नीदरलैंड की तरफ से वहां का कृषि मंत्रालय, वैगनिंगन यूनिवर्सिटी (Wageningen University) और डच ग्रीनहाउस एलायंस जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन सबका मकसद सऊदी अरब में खेती को आधुनिक बनाना और दुनिया के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनाना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सऊदी और नीदरलैंड के बीच इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य पोल्ट्री वेस्ट मैनेजमेंट को बेहतर बनाना और आधुनिक तकनीक के जरिए खेती की पैदावार बढ़ाना है। इसके जरिए पानी की बचत और फसलों की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया गया है।
इस समझौते के तहत कुल कितना निवेश किया गया है?
जून 2025 के समझौतों के तहत कुल निवेश 428 मिलियन सऊदी रियाल (114.1 मिलियन डॉलर) से अधिक है। इसमें आलू की खेती और प्रोसेसिंग यूनिट के लिए 76 मिलियन रियाल का अलग सौदा भी शामिल है।
