सऊदी अरब और मिस्र अब मिडिल ईस्ट में शांति लाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। सऊदी विदेश मंत्री ने मिस्र के विदेश मंत्री के साथ तनाव कम करने और डिप्लोमैटिक समाधान निकालने पर चर्चा की। इस पूरी कोशिश में पाकिस्तान की मध्यस्थता बहुत अहम है, जो अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ा रहा है।

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सऊदी और मिस्र की बातचीत में क्या खास था?

सऊदी अरब के विदेश मंत्री और मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलाती ने फोन पर बातचीत की। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए सैन्य तनाव को कम करना जरूरी है। इसके लिए एक क्षेत्रीय परामर्श मंच बनाया गया है जिसमें सऊदी अरब, मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की के विदेश मंत्री शामिल हैं। यह समूह दुनिया की अर्थव्यवस्था और एनर्जी सिक्योरिटी को बचाने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका और ईरान विवाद में पाकिस्तान की भूमिका क्या है?

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार इस विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता की वजह से ही 8 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हुआ था, जिसे बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया। इसके अलावा, पाकिस्तान ने 20 ईरानी और 11 पाकिस्तानी नाविकों को वापस लाने में भी मदद की, जिसकी तारीफ मिस्र के विदेश मंत्री ने की।

क्षेत्रीय तनाव की मुख्य वजह क्या थी?

यह पूरा मामला फरवरी 2026 में शुरू हुआ था जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए थे। इसके जवाब में तेहरान ने भी पलटवार किया और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया था। इसी तनाव को देखते हुए मार्च 2026 से मिस्र, तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान मिलकर काम कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्षेत्रीय परामर्श मंच (Regional Consultative Forum) में कौन से देश शामिल हैं?

इस मंच में पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री शामिल हैं जो क्षेत्रीय शांति के लिए काम कर रहे हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कब हुआ था?

पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद 8 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हुआ था।