सऊदी अरब के एनर्जी सेक्टर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। 9 अप्रैल 2026 को सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि देश के महत्वपूर्ण एनर्जी प्लांट और पाइपलाइनों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों की वजह से जुआयमाह (Juaymah) के प्रोसेसिंग सेंटर में आग लग गई जिससे LPG और नेचुरल गैस की सप्लाई और एक्सपोर्ट पर बुरा असर पड़ा है। इस घटना में सुरक्षा विभाग के एक कर्मचारी की जान चली गई है और 7 अन्य लोग घायल हुए हैं।

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किन-किन जगहों पर हुआ हमला और क्या हुआ नुकसान?

सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि देश के कई एनर्जी ठिकानों को हाल ही में निशाना बनाया गया है। इन हमलों का सबसे बड़ा असर जुआयमाह के प्रोसेसिंग प्लांट पर पड़ा है जहां आग लगने की वजह से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और नेचुरल गैस लिक्विड का निर्यात प्रभावित हुआ है। इसके अलावा ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशन को भी निशाना बनाया गया है जिससे तेल की सप्लाई में बड़ी बाधा आई है। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह के हमलों से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

सप्लाई और उत्पादन पर कितना असर पड़ा है?

इन हमलों के कारण सऊदी अरब की तेल उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट देखी गई है। अलग-अलग सेंटरों पर हुए नुकसान की जानकारी नीचे दी गई है जिससे आप समझ सकते हैं कि सप्लाई पर कितना बोझ पड़ा है:

प्रभावित केंद्र या पाइपलाइन उत्पादन या सप्लाई में कमी (प्रतिदिन)
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन 7,00,000 बैरल
मनीफा (Manifa) प्लांट 3,00,000 बैरल
खुरैस (Khurais) प्लांट 3,00,000 बैरल
कुल उत्पादन में कमी लगभग 1.3 मिलियन बैरल

इन हमलों का असर केवल उत्पादन पर ही नहीं बल्कि जुबैल, रास तनुरा, यानबू और रियाद की रिफाइनरियों पर भी पड़ा है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि अगर ये हमले जारी रहते हैं तो इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कमी हो सकती है क्योंकि दुनिया के कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सऊदी अरब पर निर्भर हैं।