सऊदी अरब के राजदूत ने 24 जुलाई 2026 को यह साफ कर दिया है कि यमन का हूती मिलिशिया अब बाहरी देशों के इशारों पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि हूतियों ने यमन को एक मोहरा बना दिया है, जिसका इस्तेमाल वे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर रहे हैं। इस वजह से यमन की सुरक्षा और स्थिरता खतरे में पड़ गई है।
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तनाव में बढ़ोत्तरी और सुरक्षा चुनौतियां
सऊदी अरब और यमन की सरकार के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। हाल ही में हूतियों ने सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे और जहाजों को निशाना बनाया है। इस बीच, 21 जुलाई 2026 को किंग सलमान की अध्यक्षता में हुई सऊदी कैबिनेट ने हूतियों के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया। सऊदी सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलकी ने यह पक्का किया है कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखा जाएगा और समुद्री डकैती जैसे हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
क्षेत्रीय संघर्ष और हूतियों की नाकेबंदी
क्षेत्रीय तनाव तब और गहरा गया जब 24 जुलाई 2026 को अमेरिकी मिसाइलों ने ईरान के ठिकानों पर हमला किया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान और यमन में उनके हूती सहयोगियों को चेतावनी दी है। इसी बीच, हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ एक नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की है। उन्होंने 22 जुलाई 2026 को बाब अल-मंदेब में दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमला भी किया था। संयुक्त राष्ट्र में यमन के प्रतिनिधि अब्दुल्ला सादी ने पहले ही चेतावनी दी थी कि सना एयरपोर्ट पर ईरान की अनाधिकृत उड़ानें अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं और इससे दुनिया भर में शांति को खतरा है।
