बेल्जियम के ब्रुसेल्स शहर में 20 अप्रैल 2026 को एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक हुई। इस मीटिंग की अगुवाई सऊदी अरब, यूरोपीय संघ (EU) और नॉर्वे ने मिलकर की। इस बैठक का मुख्य मकसद फिलिस्तीन और इसराइल के बीच दो-राज्य समाधान (Two-State Solution) को लागू करने के लिए दुनिया भर के देशों को एक साथ लाना था, जिसमें कुल 83 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
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बैठक में कौन शामिल हुआ और मुख्य मकसद क्या था?
इस मीटिंग की सह-अध्यक्षता सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सउद, यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कालस और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने की। मीटिंग का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर दो-राज्य समाधान को मजबूत करना था। काजा कालस ने साफ कहा कि फिलिस्तीन और इसराइल के लोगों के लिए शांति, सुरक्षा और सम्मान से जीने का यही एक इकलौता रास्ता है।
फिलिस्तीन और गाजा को लेकर क्या चर्चा हुई?
फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री मोहम्मद मुस्तफा ने बैठक में जोर देकर कहा कि गाजा फिलिस्तीन राज्य का ही एक अटूट हिस्सा है। उन्होंने मांग की कि गाजा में शासन बहाल करने और अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। मीटिंग में इसराइल द्वारा अवैध बस्तियों के विस्तार की कड़ी निंदा की गई और कहा गया कि ऐसी कोशिशें शांति की राह में बाधा डालती हैं। साथ ही फिलिस्तीनी अथॉरिटी के कामकाज के लिए रुके हुए पैसों को तुरंत जारी करने की बात कही गई।
अन्य देशों और संगठनों का क्या रुख रहा?
इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने इस बात को दोहराया कि क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के लिए दो-राज्य समाधान ही सबसे तार्किक रास्ता है। नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने बताया कि नॉर्वे ने इसराइल को हथियारों की बिक्री बंद कर दी है और कुछ सरकारी मंत्रियों पर टारगेटेड प्रतिबंध लगाए हैं। इस मुख्य मीटिंग के साथ-साथ गाजा और वेस्ट बैंक की मदद के लिए एक AHLC मंत्रिस्तरीय बैठक भी हुई।
| प्रमुख सदस्य/संस्था | भूमिका/कथन |
|---|---|
| सऊदी अरब | मीटिंग की सह-अध्यक्षता की |
| यूरोपीय संघ (EU) | दो-राज्य समाधान को एकमात्र रास्ता बताया |
| नॉर्वे | इसराइल को हथियार बिक्री बंद करने का ऐलान किया |
| मोहम्मद मुस्तफा | गाजा को फिलिस्तीन का हिस्सा बताया |
| OIC | शांति के लिए व्यापक योजना शुरू करने की मांग की |
| काजा कालस | अवैध बस्तियों के विस्तार का विरोध किया |
