सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने बहरीन के मनामा में कतर और ओमान के विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग मुलाकात की। इस बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते और उससे पूरे इलाके की सुरक्षा पर पड़ने वाले असर पर चर्चा हुई। यह सभी बैठकें GCC और अमेरिका के बीच हुई एक साझा मीटिंग के दौरान आयोजित की गईं।
अमेरिका और ईरान के समझौते पर चर्चा
यह मुलाकात 25 जून 2026 को हुई। प्रिंस फैसल ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमन बिन जसीम अल थानी के साथ 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते (MOU) के बारे में बात की। दोनों नेताओं ने इस बात पर चर्चा की कि इस समझौते से क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर क्या असर पड़ेगा।
ओमान के साथ बैठक और अहम मुद्दे
एक दूसरी बैठक में प्रिंस फैसल ने ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद बिन हमूद अल बुसाइड के साथ मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आपसी रिश्तों को मजबूत करने और खाड़ी देशों की एकजुटता बढ़ाने पर जोर दिया। ओमान के मंत्री ने अमेरिका-ईरान समझौते का समर्थन किया और कहा कि शांति बनाए रखने के लिए इसके लक्ष्यों का सफल होना जरूरी है। ओमान ने यह भी साफ किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर कोई ट्रांजिट फीस नहीं लगाई जाएगी।
समझौते की मुख्य बातें
अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते के कुछ अहम बिंदु इस प्रकार हैं:
- दोनों देशों के बीच चल रही लड़ाई और दुश्मनी को खत्म करना।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना ताकि जहाजों की आवाजाही आसान हो।
- ईरानी तेल के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना।
- अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय भूमिका पर बातचीत करना।
- ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने और समुद्र में सुरक्षित आवाजाही की गारंटी दी है।
GCC और अमेरिका का रुख
GCC देशों ने इस समझौते का स्वागत किया है और इसमें पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की तारीफ की है। हालांकि, GCC देशों ने यह साफ किया कि स्थायी शांति के लिए ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना होगा। साथ ही, ईरान द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइल और दूसरे देशों में उसके समर्थित गुटों (proxies) के खतरों को खत्म करना जरूरी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खाड़ी देशों को भरोसा दिलाया कि ईरान के साथ किसी भी डील में उनके हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर कोई भी देश ट्रांजिट फीस नहीं वसूल सकता। उन्होंने एक ऐसी डील की इच्छा जताई जो असली हो और जिसका पूरी तरह पालन किया जाए।
