सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan Al Saud ने 21 जुलाई 2026 को चेतावनी दी है कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव अब सिर्फ स्थानीय नहीं रह गया है। इस स्थिति का सीधा असर ग्लोबल सिक्योरिटी, तेल की कीमतों और आर्थिक विकास पर पड़ रहा है। हाल के दिनों में क्षेत्रीय हालातों के तेजी से बिगड़ने के कारण पूरी दुनिया में चिंता बनी हुई है।
समुद्री रास्तों पर मंडराया संकट
यह बयान ऐसे समय में आया है जब 20 जुलाई 2026 को यमन के Houthi विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जहाजों को Bab al-Mandab Strait से गुजरने पर रोकने की धमकी दी है। हूतियों ने इसे रियाद द्वारा यमनी बंदरगाहों पर लगाए गए कथित प्रतिबंधों का जवाब बताया है। सऊदी विदेश मंत्रालय और गठबंधन सेना ने इस धमकी की कड़ी निंदा की है और कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इस मामले में मिस्र ने भी सऊदी अरब का समर्थन किया है और इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक खतरनाक कदम बताया है।
कूटनीतिक बातचीत और सुरक्षा पर जोर
तनाव को कम करने के लिए सऊदी विदेश मंत्री ने सक्रिय कूटनीति तेज कर दी है। उन्होंने 21 जुलाई 2026 को बहरीन, मिस्र, तुर्की और इथियोपिया के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात की और स्थिरता बनाए रखने पर चर्चा की। इससे एक दिन पहले, 20 जुलाई 2026 को उन्होंने रियाद में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval से मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर चर्चा हुई। इन सबके बीच, ASEAN देशों के विदेश मंत्री भी Hormuz Strait से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की मांग उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
