सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने पोलैंड के वारसा में 26 जनवरी को कहा कि संयुक्त अरब अमीरात को यमन से पूरी तरह निकल जाना जरूरी है ताकि सऊदी अरब और UAE के बीच मजबूत और सकारात्मक रिश्ते बने रहें।

UAE की निकासी पर क्या कहा सऊदी मंत्री ने

सऊदी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि यमन के मुद्दे पर सऊदी अरब और UAE के बीच नजरिए में अंतर है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सकारात्मक रिश्ते खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) का एक बुनियादी हिस्सा हैं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

UAE ने कब की यमन से निकासी की घोषणा

संयुक्त अरब अमीरात ने 30 दिसंबर 2025 को यमन से निकलने का इरादा जताया था। यह घोषणा सऊदी अरब की मुक़ल्ला बंदरगाह पर हवाई हमलों और यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल की ओर से 24 घंटे की अल्टीमेटम के बाद आई थी।

UAE की निकासी कब पूरी हुई

संयुक्त अरब अमीरात ने 2 जनवरी 2026 तक यमन से अपनी पूरी निकासी पूरी कर ली थी। इसके बाद ही सऊदी विदेश मंत्री ने वारसा में इस बारे में बयान दिया।

क्या है GCC का महत्व

खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) में सऊदी अरब, UAE, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन शामिल हैं। सऊदी मंत्री के अनुसार इन देशों के बीच मजबूत रिश्ते क्षेत्र की स्थिरता के लिए आवश्यक हैं।

इस बयान का क्या मतलब है

सऊदी विदेश मंत्री का यह बयान दर्शाता है कि सऊदी अरब UAE के साथ अपने रिश्तों को यमन के मुद्दे से अलग रखना चाहता है। दोनों देशों के बीच यमन पर मतभेद रहे हैं, लेकिन सऊदी अरब इन्हें दोनों देशों की साझेदारी में बाधा नहीं बनने देना चाहता।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.