सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और फ्रांस के राष्ट्रपति ने मिडिल ईस्ट में शांति बनाए रखने के लिए एक साथ आने का फैसला किया है। दोनों नेताओं ने कहा कि इलाके में बढ़ रहे तनाव को कम करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक रास्ते अपनाना सबसे बेहतर तरीका है। सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) ने इस साझा रुख की पुष्टि की है।
दोनों नेताओं ने कई बार बातचीत कर यह साफ किया कि वे क्षेत्र में स्थिरता चाहते हैं। 31 मई 2026 को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के बीच फोन पर बात हुई। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा और समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने के तरीकों पर चर्चा की ताकि व्यापार और जहाजों की आवाजाही में कोई दिक्कत न आए।
इससे पहले 23 मार्च 2026 को राष्ट्रपति मैक्रॉन ने सऊदी अरब के साथ अपनी एकजुटता जताई थी। उन्होंने ईरान द्वारा सऊदी अरब पर किए गए हमलों की निंदा की और कहा कि सऊदी अपनी सुरक्षा और संप्रभुता बनाए रखने के लिए जो कदम उठा रहा है, फ्रांस उसका समर्थन करता है। 13 मार्च 2026 को भी दोनों नेताओं ने सैन्य तनाव को रोकने और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों को खत्म करने पर जोर दिया था।
तनाव कम करने की यह कोशिश काफी समय से चल रही है। जून 2025 में दोनों नेताओं ने ईरान पर इजरायली ऑपरेशंस के बाद संयम बरतने और विवादों को बातचीत से सुलझाने की बात कही थी। अगस्त 2024 में गाजा में युद्धविराम और संघर्ष को फैलने से रोकने पर भी चर्चा हुई थी।
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रॉन ने जून 2026 में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से भी अपील की थी कि वे पाकिस्तान में होने वाली बातचीत का इस्तेमाल करें ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति आ सके। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा और लेबनान में युद्धविराम के पालन पर भी जोर दिया।
अक्टूबर 2023 में क्राउन प्रिंस ने गाजा में आम नागरिकों की जान बचाने, मानवीय मदद पहुँचाने और फिलिस्तीनी अधिकारों के लिए शांति प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत बताई थी। इससे पहले जून 2023 में पेरिस दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने सऊदी और ईरान के बीच बहाल हुए संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता पर बात की थी। दिसंबर 2021 में भी एक साझा बयान जारी किया गया था जिसमें मिडिल ईस्ट और दुनिया भर में शांति के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की बात कही गई थी।
