सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट ने क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को लेकर अहम बातचीत की है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि इलाके में शांति बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। इस चर्चा का मुख्य मकसद क्षेत्रीय तनाव को कम करना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना था।
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रियाद में हुई एक मुलाकात के दौरान दोनों मंत्रियों ने आपसी संबंधों को बेहतर बनाने और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। इस दौरान ईरान और लेबनान में चल रहे तनाव को कम करने और वहां स्थायी शांति लाने के रास्तों पर बात हुई। फ्रांस ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना किसी शर्त के तुरंत खोला जाना चाहिए ताकि समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए।
बातचीत में ईरान के परमाणु हथियारों की कोशिशों और उसके ड्रोन प्रोग्राम पर भी गहरी चिंता जताई गई। दोनों मंत्रियों ने कहा कि ईरान की इन गतिविधियों को रोकने के लिए डिप्लोमैटिक रास्ता अपनाना जरूरी है। फ्रांस ने सऊदी अरब के प्रति अपनी एकजुटता जताई और साफ कहा कि वह जरूरत पड़ने पर किंगडम की रक्षा में मदद करने के लिए तैयार है।
इसके बाद साइप्रस में यूरोपीय संघ की बैठक के दौरान भी दोनों नेताओं ने मुलाकात की। यहां ईरान संकट के राजनीतिक समाधान और समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने के लिए एक रक्षात्मक मिशन तैनात करने पर चर्चा हुई। साथ ही, इसराइल और लेबनान के बीच 17 अप्रैल से शुरू हुए युद्धविराम का पूरी तरह पालन करने की बात कही गई ताकि बातचीत के जरिए कोई ठोस समाधान निकल सके।
दोनों देशों ने माना कि सऊदी अरब और फ्रांस के बीच गहरे संबंध हैं और वे क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहेंगे।
