खाड़ी देशों में समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए सऊदी अरब और GCC के सदस्य देशों ने एक अहम बैठक की है। सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने 28 जुलाई 2026 को कुवैत, कतर और बहरीन के विदेश मंत्रियों के साथ वर्चुअल मीटिंग की। इस बातचीत का मुख्य मकसद समुद्री रास्ते में चल रही बाधाओं को दूर करना और व्यापार के लिए रास्तों को सुरक्षित बनाए रखना है।
समुद्री सुरक्षा और कूटनीति पर जोर
बैठक के दौरान सभी मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि आपसी बातचीत और कूटनीति के जरिए ही क्षेत्रीय तनाव को कम किया जा सकता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और बाब अल-मंडेब जैसे संवेदनशील इलाकों में जहाजों की आवाजाही को अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत सुरक्षित रखने पर सहमति बनी है। इससे पहले 26 और 27 जुलाई 2026 को भी कतर और कुवैत के वरिष्ठ अधिकारियों ने सऊदी विदेश मंत्री से फोन पर बात की थी, जिसमें इन रास्तों पर व्यापार को निर्बाध रखने की अपील की गई थी।
बढ़ते तनाव और सुरक्षा चुनौतियां
क्षेत्र में सुरक्षा की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि कुछ दिनों से जहाजों पर हमलों की खबरें आ रही हैं। यमन की विदेश मंत्री-पदनामित अफराह अल-ज़ोबा ने बताया कि हूती समूह समुद्री व्यापार में रुकावट डालने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा 21 जुलाई को ऐसी खबरें आई थीं कि हूती बलों ने सऊदी के जहाजों के लिए बाब अल-मंडेब को बंद करने की घोषणा की है। वहीं, ईरान ने भी ओमान के साथ हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अस्थाई समझौता प्रस्तावित किया है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि इस पर बात न बनने की स्थिति में रास्ता बंद रखा जा सकता है।
