सऊदी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बहुत बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब अगर यह पता चलता है कि कोई सरकारी समझौता या कॉन्ट्रैक्ट रिश्वत, धोखाधड़ी या हेराफेरी के जरिए लिया गया है, तो उसे तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। सरकार का मकसद सरकारी कामकाज में पूरी ईमानदारी लाना है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की जगह न रहे।

सख्त कानूनों का जाल

सऊदी अरब में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कई कड़े नियम बनाए गए हैं। Government Tenders and Procurements Law 2019 के तहत सरकार के पास यह पावर है कि वह रिश्वत या गड़बड़ी पाए जाने पर किसी भी कॉन्ट्रैक्ट को खत्म कर सके। वहीं, Oversight and Anti-Corruption Authority (Nazaha) के नए कानून के मुताबिक, भ्रष्टाचार में फंसे किसी भी सरकारी कर्मचारी को तुरंत नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

  • रिश्वतखोरी का नियम: रिश्वत लेने या देने वालों को 10 साल तक की जेल और 10 लाख रियाल तक का जुर्माना हो सकता है।
  • कंपनियों पर कार्रवाई: ऐसी कंपनियां जो रिश्वत में शामिल पाई जाती हैं, उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और उन्हें भविष्य में सरकारी प्रोजेक्ट्स से ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
  • वित्तीय धोखाधड़ी: धोखाधड़ी करने वालों को 7 साल की जेल और 50 लाख रियाल तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।

हाल की बड़ी कार्रवाइयां

Nazaha ने हाल ही में कई बड़े खुलासे किए हैं। 2 फरवरी 2026 को उन सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया जिन्होंने करीब 10 मिलियन रियाल की धोखाधड़ी की थी। इनमें हेल्थ सेक्टर और सिविल अफेयर्स के कर्मचारी शामिल थे जिन्होंने गलत तरीके से कॉन्ट्रैक्ट दिए और फर्जी आईडी कार्ड जारी किए।

इन्वेस्टमेंट मिनिस्टर Khalid Al-Falih ने कहा कि इन कानूनों से निवेशकों के लिए माहौल सुरक्षित होगा और देश की आर्थिक तरक्की बढ़ेगी। Nazaha ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी कार्रवाई जारी रहेगी और इसमें किसी भी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।