सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक हेल्थ प्रैक्टिशनर का प्रोफेशनल लाइसेंस निलंबित कर दिया है। यह सख्त कदम सोशल मीडिया पर ‘exosome’ नाम के एक प्रोडक्ट का बिना अनुमति प्रचार करने की वजह से उठाया गया है। मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
जांच में सामने आया कि इस प्रैक्टिशनर ने Saudi Food and Drug Authority (SFDA) के नियमों को ताक पर रखा। उन्होंने इस प्रोडक्ट को उन कामों के लिए प्रमोट किया जिनके लिए इसे मंजूरी नहीं मिली थी। साथ ही, उन्होंने वैज्ञानिक सबूत देने के बजाय अपने और अन्य लोगों के निजी अनुभवों के आधार पर इसके असर और सुरक्षा के दावे किए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर अपने साथी डॉक्टरों की भी आलोचना की, जो मेडिकल एथिक्स के खिलाफ है। मंत्रालय ने कहा कि प्रोफेशनल मतभेदों को आपसी सम्मान और वैज्ञानिक चर्चा से सुलझाना चाहिए। निजी अनुभव या सुनी-सुनाई बातें वैज्ञानिक सबूत नहीं मानी जा सकतीं और इन्हें जनता के सामने इलाज के तौर पर पेश नहीं करना चाहिए।
सख्त नियमों और जुर्माने का प्रावधान
सऊदी अरब में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नियम बहुत कड़े हैं। Saudi Commission for Health Specialties के कोड ऑफ मेडिकल एथिक्स के तहत, डॉक्टर बिना अनुमति के अपना या किसी प्रोडक्ट का प्रचार नहीं कर सकते। ऐसा करने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है। इसके अलावा, साइबर क्राइम कानून के तहत सार्वजनिक मूल्यों के खिलाफ कंटेंट डालने पर 5 साल तक की जेल और 30 लाख रियाल (SR3 million) तक का जुर्माना हो सकता है।
मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि बाहरी इस्तेमाल के लिए बनाए गए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को बिना मंजूरी के मेडिकल ट्रीटमेंट या इंजेक्शन के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
बड़ी कार्रवाई का हिस्सा है यह मामला
यह कोई अकेली घटना नहीं है। सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार सोशल मीडिया और अस्पतालों की निगरानी कर रहा है। मई 2026 में चलाए गए एक अभियान में 5 स्वास्थ्य केंद्रों को बंद किया गया और 130 उल्लंघन पकड़े गए, जिनमें बिना लाइसेंस प्रैक्टिस करना शामिल था। इसमें 1 लाख रियाल तक के जुर्माने और जेल की सजा भी दी गई।
सरकार ने आम जनता से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी स्वास्थ्य पेशेवर या क्लीनिक में नियमों का उल्लंघन दिखे, तो वे इसकी जानकारी 937 कॉल सेंटर पर दें। इससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और चिकित्सा पेशे की गरिमा बनी रहेगी।
