सऊदी अरब में स्वास्थ्य नियमों को लेकर बड़ी सख्ती शुरू हो गई है। सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय (MOH) ने चेतावनी दी है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा की जाने वाली किसी भी तरह की लापरवाही या नियम उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सऊदी सरकार ने साफ़ कर दिया है कि मेडिकल क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना, जेल और लाइसेंस रद्द करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रवासी कामगारों के मेडिकल टेस्ट पर भी बढ़ी निगरानी
सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय ने जून 2026 में विदेशी कामगारों के मेडिकल टेस्ट को लेकर भी जांच तेज कर दी है। सरकार ने साफ कहा है कि जो भी अस्पताल या जांच केंद्र तय नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन पर 1 लाख सऊदी रियाल तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा ऐसे केंद्रों को 60 दिनों के लिए बंद किया जा सकता है या उनका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है। यह नियम उन प्रवासियों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है जो सऊदी अरब में नौकरी के लिए आते हैं और अपना मेडिकल टेस्ट कराते हैं।
बिना लाइसेंस इलाज करने और वीडियो बनाने पर हुई कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में कई अस्पतालों और सेंटरों पर छापेमारी की है। मई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, नियमों का उल्लंघन करने वाले 5 अस्पतालों को बंद कर दिया गया और 130 से ज्यादा नियमों के उल्लंघन के मामले पकड़े गए। इनमें बिना लाइसेंस के इलाज करना, बिना अनुमति के हेयर ट्रांसप्लांट करना और तय सीमा से अधिक जाकर मरीजों का इलाज करना शामिल है। बिना लाइसेंस प्रैक्टिस करने वालों को 6 महीने तक की जेल भी हो सकती है।
मरीजों की प्राइवेसी का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी कर दिया गया है। अल कुनफुदा में एक अस्पताल द्वारा मरीज के इलाज का वीडियो सोशल मीडिया पर डालने की वजह से उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया और बड़ा जुर्माना लगाया गया। सऊदी अरब के नियमों के तहत मरीजों की बिना इजाजत वीडियो बनाना या सोशल मीडिया पर डालना गंभीर अपराध है। इसके लिए साइबर अपराध कानून के तहत 5 साल तक की जेल और 30 लाख रियाल तक का जुर्माना हो सकता है।
सऊदी हेल्थ रेगुलेशन के मुख्य नियम
सऊदी काउंसिल फॉर हेल्थ स्पेशलिटीज और स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत:
- बिना लाइसेंस के किसी भी तरह की मेडिकल प्रैक्टिस करना पूरी तरह गैरकानूनी है।
- मरीजों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखना होगा, सोशल मीडिया पर उनका वीडियो या फोटो डालना पूरी तरह बैन है।
- दवाओं को बढ़ावा देने के लिए किसी भी तरह का कमीशन लेना या मरीजों को जबरन किसी खास दुकान पर भेजना मना है।
- सभी डॉक्टरों और डेंटिस्टों के लिए मेडिकल मालप्रैक्टिस इंश्योरेंस होना अनिवार्य है।
अगर कोई भी डॉक्टर या अस्पताल इन नियमों की अनदेखी करता है, तो स्वास्थ्य मंत्रालय मामले को सीधे कोर्ट भेजता है। दिसंबर 2022 से मरीजों के नुकसान या मौत से जुड़े मामलों की सुनवाई सीधे पब्लिक कोर्ट में की जा रही है ताकि पीड़ित लोगों को जल्द राहत मिल सके।