सऊदी अरब और ईरान के विदेश मंत्रियों ने सोमवार को फोन पर खास बातचीत की। इस चर्चा में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही डिप्लोमैटिक बातचीत के ताजा हालात पर चर्चा हुई। पाकिस्तान इन दोनों देशों के बीच बीच-बचाव की कोशिश कर रहा है, लेकिन ताजा घटनाक्रमों ने क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है।
सऊदी और ईरान के बीच क्या चर्चा हुई?
11 मई 2026 को सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan को ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi का फोन आया। दोनों नेताओं ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत के ताज़ा अपडेट्स साझा किए। इससे पहले भी अप्रैल और मई की शुरुआत में दोनों मंत्रियों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और तनाव कम करने के प्रयासों को लेकर कई बार फोन पर बात हुई थी।
अमेरिका और ईरान के बीच क्यों फंसी है बात?
ईरान ने 10 मई 2026 को अमेरिकी प्रस्ताव का जवाब भेजा था। ईरान ने अपनी शर्तों में लेबनान में संघर्ष खत्म करने, शिपिंग सुरक्षा सुनिश्चित करने, युद्ध के नुकसान की भरपाई करने और अपने तेल की बिक्री पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध हटाने की मांग की थी। लेकिन 11 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस जवाब को पूरी तरह अस्वीकार्य बताकर खारिज कर दिया। अमेरिका का कहना था कि विवादित मुद्दों जैसे परमाणु कार्यक्रम पर बात करने से पहले लड़ाई खत्म होनी चाहिए।
आम लोगों और बाज़ार पर क्या होगा असर?
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत टूटने और तनाव बढ़ने की वजह से बाज़ार में हलचल मच गई है। इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा और कच्चे तेल के दाम 3 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गए। इसके साथ ही ईरान ने ब्रिटेन और फ्रांस को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने Strait of Hormuz में अपने जहाज भेजे तो उन्हें तुरंत और कड़ा जवाब दिया जाएगा। ईरान का दावा है कि इस जलमार्ग की सुरक्षा केवल वही कर सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सऊदी और ईरान के विदेश मंत्रियों ने किस बारे में बात की?
दोनों मंत्रियों ने 11 मई 2026 को पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही डिप्लोमैटिक बातचीत के ताजा घटनाक्रमों पर चर्चा की।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को क्यों खारिज किया?
ट्रंप ने ईरान के जवाब को अस्वीकार्य बताया क्योंकि अमेरिका चाहता था कि परमाणु कार्यक्रम जैसे कठिन मुद्दों पर चर्चा करने से पहले क्षेत्र में लड़ाई पूरी तरह बंद हो।
