सऊदी अरब और कुवैत के बीच हुआ बड़ा समझौता, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को मिलेगा बढ़ावा.

Praggya Singh sabal18 August 20262 min read55 viewsSaudi
सऊदी अरब और कुवैत के बीच हुआ बड़ा समझौता, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को मिलेगा बढ़ावा.

सऊदी अरब की कैबिनेट ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को कुवैत के साथ पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर की पार्टनरशिप परियोजनाओं पर सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इस बात की जानकारी कुवैत समाचार एजेंसी KUNA द्वारा दी गई है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते आर्थिक रिश्तों की ओर इशारा करती है। यह कदम दोनों ही खाड़ी देशों के भविष्य के लिए काफी अहम माना जा रहा है।

समझौते की पूरी पृष्ठभूमि और शुरुआत

इस एमओयू (MoU) को सबसे पहले 10 नवंबर 2025 को रियाद में आयोजित सऊदी-कुवैती समन्वय परिषद की तीसरी बैठक के दौरान औपचारिक रूप दिया गया था। उस सत्र के दौरान इस समझौते पर सऊदी अरब के नेशनल सेंटर फॉर प्राइवेटाइजेशन (NCP) के सीईओ इंजीनियर Muhannad Basudan और कुवैत के वित्त मंत्रालय की अंडरसेक्रेटरी Aseel Sulaiman Al-Munifi ने हस्ताक्षर किए थे। यह पूरी प्रक्रिया सऊदी और कुवैती विदेश मंत्रालयों के मार्गदर्शन में पूरी की गई थी ताकि दोनों पड़ोसी देशों के बीच आपसी व्यापार और विकास के रास्ते आसान हो सकें।

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समझौते का मुख्य उद्देश्य और फायदे

इस समझौते का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच अनुभव और जानकारी का आदान-प्रदान करना है। इसमें विशेष रूप से पार्टनरशिप मॉडल, खरीद प्रक्रिया, प्रोजेक्ट के मूल्यांकन करने के तरीके और वित्तीय तथा परिचालन जोखिमों के प्रबंधन पर पूरा ध्यान केंद्रित किया गया है। ये सभी उपाय दोनों देशों की आर्थिक विविधता रणनीतियों का एक अहम हिस्सा हैं, ताकि आने वाले समय में तेल से होने वाली कमाई पर उनकी निर्भरता को धीरे-धीरे कम किया जा सके और दूसरे सेक्टरों को मजबूत बनाया जा सके।

नेशनल प्राइवेटाइजेशन स्ट्रेटजी और विजन 2030

यह सहयोग पूरी तरह से सऊदी अरब की व्यापक नेशनल प्राइवेटाइजेशन स्ट्रेटजी के साथ मेल खाता है। इस रणनीति को कैबिनेट द्वारा नवंबर 2025 में मंजूरी दी गई थी और इसका ऐलान नेशनल सेंटर फॉर प्राइवेटाइजेशन द्वारा जनवरी 2026 में किया गया था। इस योजना का मुख्य लक्ष्य 2030 तक 220 से अधिक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) कॉन्ट्रैक्ट हासिल करना है। इन सभी पहलों का उद्देश्य 18 लक्षित आर्थिक क्षेत्रों में निजी क्षेत्र से 64 बिलियन डॉलर से अधिक का पूंजी निवेश आकर्षित करना है, जिससे देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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