सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सोमवार, 20 जुलाई 2026 को यह ऐलान किया है कि वे Bab al-Mandab Strait में अपने समुद्री जहाजों की सुरक्षा के लिए बहुत सख्त और कड़े कदम उठाएंगे। यह फैसला यमन के Houthi आंदोलन द्वारा लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा के बाद लिया गया है। हूती प्रवक्ता Yahya Saree ने इसे यमन में सऊदी अरब की कार्रवाई का जवाब बताया है।

📰: Saudi Arabia पर हूती विद्रोहियों ने लगाया समुद्री प्रतिबंध, यमन को मदद जारी रखने के सऊदी फैसले के बीच बढ़ी तनातनी

समुद्री मार्ग पर तनाव का असर

हूतियों की इस घोषणा ने क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है क्योंकि यह इलाका पहले से ही Strait of Hormuz में ईरान की गतिविधियों के कारण चर्चा में है। सऊदी अरब अपने तेल का एक बड़ा हिस्सा अब लाल सागर में अपने Yanbu टर्मिनल के जरिए भेजता है, जिस पर इस नाकेबंदी से असर पड़ने का खतरा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता Stephane Dujarric ने चेतावनी दी है कि यह तनाव पूरे इलाके में बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है।

अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला

सऊदी गठबंधन ने स्पष्ट किया है कि उनकी कार्रवाई 1982 के United Nations Convention on the Law of the Sea के नियमों के मुताबिक है। यह कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के Resolution No. 2722 के बाद उठाया गया है, जिसे 10 जनवरी 2026 को पास किया गया था। इस प्रस्ताव में कमर्शियल जहाजों पर हूती हमलों की निंदा की गई थी और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर जोर दिया गया था।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.