सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने देश और यमन की सुरक्षा को लेकर एक बेहद जरूरी बयान जारी किया है। 3 जुलाई 2026 को गठबंधन सेना ने साफ तौर पर कहा है कि सऊदी अरब या यमन की संप्रभुता को निशाना बनाने की किसी भी कोशिश का जवाब अब बेहद सख्त और ऐतिहासिक सैन्य ताकत से दिया जाएगा। यह चेतावनी यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के हवाई अड्डों और तेल ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी के तुरंत बाद आई है।
दरअसल, यमन के हूती संगठन ने 3 जुलाई 2026 को सऊदी अरब को चेतावनी दी थी कि अगर उनके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया गया, तो वे सऊदी अरब के एयरपोर्ट, बंदरगाहों और तेल संयंत्रों पर बड़ा हमला करेंगे। हूती प्रवक्ता याह्या सारी ने इस संबंध में एक बयान जारी किया था। इससे ठीक एक दिन पहले, 2 जुलाई 2026 को हूती प्रमुख ने यमन में पूर्ण सैन्य लामबंदी की घोषणा की थी, जिससे सीमा पर तनाव काफी बढ़ गया है।
ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने सना हवाई अड्डे पर उतर रहे एक ईरानी नागरिक विमान को रोकने की कोशिश की थी। इस विमान में 200 से अधिक बीमार और घायल ईरानी नागरिक तथा हूती प्रतिनिधिमंडल सवार थे। हूतियों के अनुसार, उनके बलों ने सऊदी विमानों को पीछे हटने पर मजबूर किया और ईरानी विमान सुरक्षित रूप से उतर गया। हालांकि सऊदी अरब ने इस घटना पर सीधे तौर पर कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन गठबंधन सेना ने किसी भी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही है।
सऊदी गठबंधन सेना ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि उनकी सभी सुरक्षात्मक और सैन्य कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और इसके नियमों के दायरे में होंगी। सऊदी अरब के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि अब्दुलअजीज अलवासिल ने भी पहले स्पष्ट किया था कि देश अंतरराष्ट्रीय नियमों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। क्षेत्र में लगातार बढ़ती तनावपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।
