सऊदी अरब की ‘मक्का रूट’ पहल ने एक बार फिर तीर्थयात्रियों की राह आसान कर दी है. हाल ही में आइवरी कोस्ट के एक किसान का हज का सपना इस प्रोग्राम की वजह से पूरा हुआ. इस योजना का मुख्य मकसद यात्रियों के सफर से मुश्किलों को कम करना है ताकि वे अपनी इबादत पर ज्यादा ध्यान दे सकें.
मक्का रूट पहल क्या है और यह कैसे काम करती है?
यह प्रोग्राम 2017 में सऊदी विजन 2030 के तहत शुरू किया गया था. इसे सऊदी अरब का आंतरिक मंत्रालय (Ministry of Interior) कई अन्य सरकारी विभागों जैसे विदेश मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और हज एवं उमराह मंत्रालय के साथ मिलकर चलाता है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यात्री अपने ही देश के एयरपोर्ट पर सारी कागजी कार्रवाई पूरी कर लेते हैं.
- बायोमेट्रिक्स और हेल्थ चेक: यात्रियों की बायोमेट्रिक जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी जांचें उनके अपने देश में ही पूरी कर ली जाती हैं.
- इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा: हज वीज़ा अब इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जारी किया जाता है, जिससे समय बचता है.
- सामान की सुविधा: सामान को एयरपोर्ट पर ही कोड कर दिया जाता है, जो यात्री के पहुंचने पर सीधे मक्का या मदीना के होटल तक पहुंचता है.
- डायरेक्ट एंट्री: पासपोर्ट की प्रक्रिया घर के देश के एयरपोर्ट पर ही पूरी हो जाती है, इसलिए सऊदी पहुंचने पर यात्रियों को लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ता.
इस पहल से यात्रियों को क्या लाभ मिला और अब तक की प्रगति क्या है?
इस पहल के जरिए अब तक 12 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री लाभ उठा चुके हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 8 मई 2026 तक कुल 1,254,994 यात्रियों ने इस सुविधा का इस्तेमाल किया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सऊदी अरब में एंट्री का समय पिछले साल के 50 सेकंड से घटकर अब मात्र 40 सेकंड रह गया है.
हाल ही में इस सेवा को सेनेगल, मोरक्को और ब्रुनेई जैसे देशों में भी शुरू किया गया है. तवक्कलना (Tawakkalna) ऐप के जरिए अब यात्री अपने देश में रहते हुए ही डिजिटल हज परमिट देख सकते हैं. तुर्की और इंडोनेशिया के यात्रियों ने भी इस व्यवस्था की काफी तारीफ की है क्योंकि इससे एयरपोर्ट पर होने वाली भागदौड़ खत्म हो गई है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
मक्का रूट पहल से अब तक कितने लोग लाभ उठा चुके हैं?
इस पहल के जरिए अब तक 12 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री लाभ उठा चुके हैं. 8 मई 2026 तक कुल 1,254,994 यात्रियों ने इस सुविधा का इस्तेमाल किया है.
मक्का रूट पहल में एंट्री प्रक्रिया का समय कितना कम हुआ है?
तकनीक और AI के इस्तेमाल से एक तीर्थयात्री के लिए एंट्री प्रक्रिया का समय पिछले साल के 50 सेकंड से घटकर अब 40 सेकंड रह गया है.
