सऊदी अरब अपनी ज़मीन को हरा-भरा बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रहा है। रियाद में आयोजित सऊदी एनवायरनमेंट वीक 2026 के दौरान नेशनल अफेोरेस्टेशन प्रोग्राम ने 11 अलग-अलग संस्थाओं के साथ समझौते किए। इस पहल का मकसद पर्यावरण की रक्षा करना और आधुनिक तकनीक के ज़रिए पेड़ों की संख्या बढ़ाना है।
सऊदी अरब के इस नए प्लान का असल मकसद क्या है?
इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य सऊदी विजन 2030 के उद्देश्यों को पूरा करना है। सरकार चाहती है कि देश में वनस्पति कवर (Vegetation Cover) को बढ़ाया जाए ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे। इसके लिए प्राकृतिक चरागाहों के विकास में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही, इस काम में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और ट्रेनिंग पर भी ज़ोर दिया गया है ताकि नॉन-प्रॉफिट सेक्टर के लोग इसे बेहतर तरीके से लागू कर सकें।
कौन सी संस्थाएं शामिल हैं और कौन सी तकनीक इस्तेमाल होगी?
इस समझौते के दौरान पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय के डिप्टी मिनिस्टर इंजीनियर मंसूर बिन हिलाल अल-मशीती मौजूद रहे। समझौते करने वाली 11 संस्थाओं में मुख्य रूप से ये नाम शामिल हैं:
- Mawaredcom Business Solutions Company
- Net Zero Company
- Jasees Environmental Company
- Saudi Geologists Cooperative
- Saudi Chambers Federation
- Riyadh Green Cooperative Association
पर्यावरण को बचाने के लिए बायोचार (Biochar) जैसे नए तरीकों का इस्तेमाल होगा और ऐसे पौधों की पहचान की जाएगी जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मददगार हों।
प्राइवेट सेक्टर की भूमिका और निवेश पर क्या असर होगा?
नेशनल अफेोरेस्टेशन प्रोग्राम ने प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक नया इन्वेस्टमेंट मॉडल तैयार किया है। इसके लिए सऊदी चैम्बर्स फेडरेशन की नेशनल कमेटी फॉर सस्टेनेबिलिटी एंड ग्रीन इकोनॉमी के साथ एक अलग समझौता भी किया गया। इससे प्राइवेट कंपनियों के लिए पर्यावरण क्षेत्र में निवेश करना आसान होगा और सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने का मौका मिलेगा। इस पूरी प्रक्रिया की देखरेख नेशनल अफेोरेस्टेशन प्रोग्राम के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट इंजीनियर अहमद बिन मल्लश अल-अनज़ी कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सऊदी अरब का यह समझौता कब और कहाँ हुआ?
यह समझौता 9 मई 2026 को रियाद में हुआ, जो 3 से 9 मई तक चले सऊदी एनवायरनमेंट वीक 2026 का हिस्सा था।
पर्यावरण को बचाने के लिए किन खास तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा?
प्रोग्राम के तहत बायोचार (Biochar) के इस्तेमाल और कार्बन उत्सर्जन कम करने वाले खास पौधों की पहचान करने जैसी आधुनिक तकनीकों पर ध्यान दिया जाएगा।