सऊदी अरब की भ्रष्टाचार विरोधी संस्था Nazaha ने सरकारी विभागों में बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाया है। जून 2024 के दौरान अलग-अलग मंत्रालयों के सैकड़ों कर्मचारियों की जांच की गई, जिनमें से कई को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार को खत्म करने और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए की गई है।
जांच और गिरफ्तारियों का ब्योरा
Nazaha ने आधिकारिक तौर पर बताया कि जून 2024 में 382 अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक और प्रशासनिक मामले दर्ज किए गए। इन जांचों के बाद 155 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें सऊदी नागरिक और वहां रहने वाले निवासी दोनों शामिल हैं। कुछ लोगों को बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान संस्था ने कुल 924 छापेमारी की।
इन विभागों पर हुई कार्रवाई
इस बड़ी कार्रवाई में कुल सात मंत्रालय और एक अथॉरिटी शामिल थे:
- Ministry of Interior (गृह मंत्रालय)
- Ministry of Health (स्वास्थ्य मंत्रालय)
- Ministry of Education (शिक्षा मंत्रालय)
- Ministry of Municipal and Rural Affairs and Housing (नगरपालिका और ग्रामीण मामलों और आवास मंत्रालय)
- Ministry of Commerce (वाणिज्य मंत्रालय)
- Ministry of Transport and Logistics (परिवहन और रसद मंत्रालय)
- Ministry of Culture (संस्कृति मंत्रालय)
- Zakat, Tax and Customs Authority (ज़कात, टैक्स और सीमा शुल्क प्राधिकरण)
किन आरोपों में हुई गिरफ्तारी
पकड़े गए लोगों पर रिश्वत लेने, अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करने, दस्तावेजों में जालसाजी करने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इन सभी मामलों को अब कानूनी तौर पर पूरा करके अदालत में ले जाने की तैयारी की जा रही है।
नया कानून और सख्त नियम
सऊदी सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए 23 जुलाई 2024 को एक नया कानून मंजूर किया, जो 7 नवंबर 2024 से लागू हो गया है। इस नए कानून के तहत Nazaha को और ज्यादा शक्तियां दी गई हैं। अब भ्रष्टाचार के दोषी पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को तुरंत नौकरी से निकाल दिया जाएगा। साथ ही, उन अधिकारियों की भी जांच होगी जिनकी संपत्ति उनकी बताई गई कमाई से ज्यादा पाई जाएगी।
हालिया अपडेट
भ्रष्टाचार के खिलाफ यह मुहिम लगातार जारी है। हालिया जानकारी के अनुसार, मई 2026 में भी ऐसी ही कार्रवाई हुई, जिसमें 480 लोगों की जांच के बाद 160 सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और नगरपालिका जैसे विभाग शामिल थे और मुख्य आरोप रिश्वतखोरी और पद का गलत इस्तेमाल करना था।
