मक्का डिफेंस एग्रीमेंट पर सऊदी अरब का बड़ा बयान, सैन्य धुरी नहीं बल्कि सुरक्षा सहयोग है मकसद

Aanya7 August 20262 min read41 viewsSaudi
मक्का डिफेंस एग्रीमेंट पर सऊदी अरब का बड़ा बयान, सैन्य धुरी नहीं बल्कि सुरक्षा सहयोग है मकसद

सऊदी अरब के सार्वजनिक कूटनीति के उप मंत्री Amb. Dr. Rayed Krimly ने हाल ही में मक्का में हुए रक्षा समझौते को लेकर फैली शंकाओं पर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि Saudi Arabia, Türkiye, और Pakistan के बीच हुआ यह रक्षा समझौता किसी प्रकार की सैन्य धुरी या किसी विशेष गुट को बनाने के लिए नहीं किया गया है। यह समझौता मुख्य रूप से क्षेत्र में शांति बनाए रखने और एक-दूसरे के सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।

समझौते का मुख्य उद्देश्य और स्पष्टीकरण

इस समझौते को लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर विराम लगाते हुए Dr. Rayed Krimly ने बताया कि इसका संबंध परमाणु महत्वाकांक्षाओं या हथियारों की होड़ से बिल्कुल नहीं है। सऊदी अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि यह समझौता किसी भी अन्य देश की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है। इसका उद्देश्य सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक तैयारी को बेहतर करना है। यह समझौता उन देशों के बीच हुआ है जो लंबे समय से ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों से जुड़े हुए हैं।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

इस समझौते के तहत यह नियम तय किया गया है कि यदि इन तीन देशों में से किसी एक पर भी कोई बाहरी सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस तरह का तालमेल आपसी सुरक्षा क्षमताओं को एकीकृत करने में मदद करेगा। सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री Mohammed bin Salman, तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Muhammad Shehbaz Sharif की मौजूदगी में यह समझौता कई वर्षों की गहन बातचीत के बाद अंतिम रूप दिया गया है।

अन्य संबंधों पर नहीं पड़ेगा कोई असर

सऊदी सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस नए समझौते का असर सऊदी अरब के अपने अन्य खाड़ी देशों, अरब सहयोगियों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ चल रहे संबंधों पर नहीं पड़ेगा। यह नया तालमेल मौजूदा द्विपक्षीय या बहुपक्षीय समझौतों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनके साथ-साथ काम करेगा।

सऊदी प्रशासन का मानना है कि इस तरह के रक्षा प्रयास क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए जरूरी हैं। सऊदी सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस समझौते का मुख्य फोकस रक्षा क्षमताओं को टिकाऊ बनाना है, ताकि भविष्य में आने वाली किसी भी सुरक्षा चुनौती का मिलकर मजबूती से सामना किया जा सके। इस मुद्दे पर अधिक जानकारी के लिए Gulfhindi.com पर बने रहें।

Share:

Comments

Leave a comment