सऊदी अरब और पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने फोन पर बातचीत की और इस बात पर जोर दिया कि यह लड़ाई पूरे इलाके की शांति के लिए खतरा है। यह चर्चा ऐसे समय में हुई जब ईरान और अमेरिका के बीच हालात काफी बिगड़ चुके हैं।
11 जुलाई 2026 को सऊदी विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan Al Saud और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री Ishaq Dar के बीच बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने कहा कि जून 2026 में इस्लामाबाद में एक समझौता (MoU) हुआ था, लेकिन मौजूदा हालात ने उस शांति की कोशिशों को नुकसान पहुँचाया है। पाकिस्तान ने मांग की है कि सभी पक्ष संयम बरतें और बातचीत के जरिए मामला सुलझाएं।
क्यों बढ़ा तनाव
तनाव तब बढ़ा जब Strait of Hormuz में कमर्शियल जहाजों पर ईरान ने हमले किए। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ऐलान किया कि अब युद्धविराम खत्म हो गया है। Trump ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने किसी को मारने की धमकी दी, तो अमेरिका 1000 मिसाइलें दागने के लिए तैयार है।
दूसरी तरफ ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 8 और 9 जुलाई को हुए अमेरिकी हमलों में 17 लोग मारे गए और 115 लोग घायल हुए। ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Mojtaba Khamenei ने अपने पूर्ववर्ती की मौत का बदला लेने की कसम खाई है। अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, जिसे ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने समझौते का उल्लंघन बताया है।
शांति के लिए कोशिशें
इस संकट को रोकने के लिए कई देशों की कोशिशें जारी हैं। सऊदी विदेश मंत्री Prince Faisal ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से इस बारे में चर्चा की। वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi बातचीत के लिए ओमान की राजधानी मस्कट पहुंचे हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने भी ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और कतर के अमीर Sheikh Tamim bin Hamad Al Thani से अलग-अलग बात की और डिप्लोमेटिक रास्तों को अपनाने की सलाह दी।
अब अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत जल्द ही इस्लामाबाद में फिर से शुरू होगी। अमेरिका ने शर्त रखी है कि ईरान को सार्वजनिक रूप से वादा करना होगा कि Strait of Hormuz में जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा और उन पर हमले बंद होंगे।
